खीरी में एफआईआर के लिए बदलवाते हैं तहरीर, पीड़ितों ने लगाए गंभीर आरोप

लखीमपुर खीरी , 35

लखीमपुर-खीरी। जिले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को अपनी ही तहरीर बदलवानी पड़ रही है। कई थानों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं जहां पुलिसकर्मी पीड़ित की लिखी पहली तहरीर को दरकिनार कर अपने हिसाब से तहरीर लिखवाते हैं, तभी केस दर्ज करते हैं।
एसपी से लेकर डीजीपी तक के स्पष्ट निर्देश हैं कि एफआईआर न लिखने वाले थानाध्यक्ष पर कार्रवाई होगी। इसके बावजूद जिले में हाल के दिनों में किसी भी पुलिसकर्मी पर एफआईआर दर्ज न करने की लापरवाही पर कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसी वजह से थानों में मुंशी, दीवान और दरोगा स्तर पर हीला-हवाली के आरोप लग रहे हैं।

तिलक समारोह जा रहे युवक से मारपीट, अंगूठी छीनने का आरोप

ताजा मामला फरधान थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार विमल शुक्ला अपने साथी के साथ तिलक समारोह में जा रहे थे। रास्ते में लीला कुआं के पास पानी पीने के लिए रुके तो वहां कुछ युवकों से कहासुनी हो गई। आरोप है कि विरोध करने पर हमलावरों ने अपने अन्य साथियों को बुलाकर विमल व उनके साथी की बुरी तरह पिटाई कर दी। पीड़ित का आरोप है कि हमलावरों ने अंगूठी भी छीन ली और बाइक तोड़ दी।

पीड़ित ने 112 डायल किया। पुलिस के पहुंचने से पहले ही हमलावर भाग गए, लेकिन एक आरोपी को पुलिस ने पकड़कर थाने में बैठा लिया। पीड़ित को सुबह तहरीर लेकर आने को कहकर थाने से भेज दिया गया।

साहब के हिसाब से लिखो तहरीर
  
अगले दिन सुबह 11 बजे जब पीड़ित तहरीर लेकर थाने पहुंचा तो पुलिस को उसकी तहरीर पसंद नहीं आई। आरोप है कि पुलिस ने कहा कि घटना भले ही पीड़ित के साथ हुई हो, लेकिन तहरीर पुलिस के बताए अनुसार लिखी जाएगी, तभी कार्रवाई होगी। चोटिल पीड़ित के पास पुलिस के कहे अनुसार तहरीर लिखवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।पीड़ितों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं जिले के अधिकांश थानों में आम हो गई हैं। अधिकतर मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय शांति भंग में चालान कर अपना पल्ला झाड़ लेती है। 
बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि पहले भी ऐसा होता था, लेकिन इधर घटनाएं काफी बढ़ गई हैं और इस पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा।

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