*श्री राम बाटिका धाम में शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भक्तिमय हुआ माहौल, संतोष गिरी महाराज ने सुनाया समुद्र मंथन प्रसंग*

लखीमपुर खीरी , 1

*धौरहरा, खीरी।* धौरहरा कस्बे के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री राम बाटिका धाम में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वृंदावन से पधारे कथा व्यास संतोष गिरी महाराज ने भगवान शिव के स्वरूप, महिमा और लोककल्याण के कार्यों का विस्तार से वर्णन किया।  

कथा के दौरान महाराज ने समुद्र मंथन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमें से हलाहल विष निकला। उस विष के प्रभाव से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई थी। जगत को बचाने के लिए देवाधिदेव शिव ने स्वयं उस विष का पान कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, तभी से वे नीलकंठ कहलाए।  

संतोष गिरी महाराज ने कहा कि  महादेव शिव त्याग, करुणा और लोककल्याण के प्रतीक हैं। उनकी उपासना बेहद सरल है। वे इतने दयालु हैं कि एक लोटा जल अर्पित करने वाले भक्त के भी सभी कष्ट हर लेते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे शिव के आदर्शों को जीवन में अपनाएं और समाज कल्याण के लिए कार्य करें।  

कथा के दौरान शिव भजनों और भक्तिगीतों से पूरा पंडाल गूंजता रहा। श्रद्धालु "हर हर महादेव" और "बम बम भोले" के जयकारे लगाते रहे। भक्ति और भजन के माहौल में लोग भावविभोर नजर आए।  

कार्यक्रम में मुख्य आयोजक गीता किन्नर के साथ क्षेत्र के अनेक कथा प्रेमी, महिला-पुरुष श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने बताया कि कथा प्रतिदिन निर्धारित समय पर होगी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।

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