फूलबेहड़ के संविलयन विद्यालय मुकुंदा में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष निर्माण में 5 लाख के घोटाले का आरोप, रिटायरमेंट के बाद भी चल रहा निर्माण कार्य
लखीमपुर खीरी May 17, 2026 at 05:17 PM , 19(हरिशंकर मिश्र)
*लखीमपुर खीरी।* बेसिक शिक्षा विभाग में निर्माण कार्यों और एमडीएम में अनियमितता के आरोप फिर सामने आए हैं। ब्लॉक फूलबेहड़ के संविलयन विद्यालय मुकुंदा में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष निर्माण में भारी धांधली का मामला प्रकाश में आया है।
सरकार द्वारा संविलयन विद्यालय मुकुंदा में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष निर्माण के लिए लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक अनिल दीक्षित ने मानक के विपरीत घटिया सामग्री से निर्माण कराया।
आरोप है कि ठेकेदारी प्रथा से मिले सरकारी धन के आधे धान में ही कक्षा-कक्ष खड़ा कर शेष धनराशि का गबन कर लिया गया। नियमानुसार निर्माण कार्य विद्यालय प्रबंध समिति से कराया जाना चाहिए, लेकिन ठेकेदार को काम देकर नियमों की अनदेखी की गई।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि प्रधानाध्यापक अनिल दीक्षित रिटायर हो चुके हैं, लेकिन अतिरिक्त कक्षा-कक्ष का निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है। वहीं दूसरी ओर वह अपनी पेंशन संबंधी कार्य के लिए बीएसए कार्यालय लखीमपुर के चक्कर लगा रहे हैं।
*एमडीएम और अन्य मदों पर भी आरोप:*
1. *मिड-डे-मील*: आरोप है कि छात्रों के एमडीएम में हर रोज कमीशन लिया जाता है। भोजन की गुणवत्ता और मात्रा मानक के अनुसार नहीं दी जाती।
2. *रंगाई-पुताई*: कायाकल्प के तहत विद्यालय की रंगाई-पुताई में भी निम्न स्तर की सामग्री लगाकर धन की बंदरबांट का आरोप है।
3. *खेल सामग्री*: छात्रों के लिए आने वाली खेलकूद सामग्री की खरीद में भी भारी घोटाले का आरोप लगाया गया है।
4. *शिक्षण व्यवस्था*: ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानाध्यापक कभी समय से विद्यालय नहीं आते थे। 50 रुपये मानदेय पाने वाली रसोइया ही रोज समय से स्कूल खोलती थी।
*ग्रामीणों की मांग:*
1. जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएं।
2. तकनीकी टीम से निर्माण की गुणवत्ता और खर्च की जांच हो।
3. एमडीएम, रंगाई-पुताई और खेल सामग्री खरीद की भी ऑडिट कराई जाए।
4. दोषी पाए जाने पर रिकवरी के साथ एफआईआर दर्ज हो और पेंशन रोकी जाए।
*विभागीय नियम क्या कहते हैं:*
परिषदीय विद्यालयों में निर्माण कार्य के लिए ठेकेदारी प्रथा प्रतिबंधित है। निर्माण एसएमसी के माध्यम से जेई के एस्टीमेट पर होना चाहिए। रिटायरमेंट के बाद कोई भी वित्तीय या निर्माण संबंधी कार्य प्रधानाध्यापक नहीं करा सकता। बाकी विभागीय निष्पक्ष जांच में ही सच्चाई सामने आएगी।































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