*भीषण गर्मी से बेहाल दुधवा, वाटरहोल्स बने वन्यजीवों का सहारा*

लखीमपुर खीरी , 37

(सुनहरा/केके शुक्ला)

*लखीमपुर खीरी।* मई की शुरुआत से ही पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने इंसानों के साथ दुधवा टाइगर रिजर्व और बफरजोन के वन्यजीवों को भी बेहाल कर दिया है। तापमान 44 डिग्री पार पहुंचने के बाद बाघ, तेंदुआ, जंगली हाथी, बारहसिंघा, चीतल, भालू, बंदर, सियार और सैकड़ों प्रजाति के पक्षी दिन का अधिकतर समय जलाशयों और वाटरहोल्स के आसपास बिता रहे हैं।  

*200 से अधिक वाटरहोल्स में पानी की व्यवस्था*  
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन और उप निदेशक जगदीश आर. ने बताया कि गर्मी के कारण प्राकृतिक जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं। ऐसे में वन विभाग ने सभी रेंज में बने 200 से अधिक वाटरहोल्स की सफाई कराकर उन्हें सोलर पंप और टैंकरों से भरवा दिया है। किशनपुर वन्यजीव विहार, कतर्नियाघाट और दक्षिण सोनारीपुर रेंज में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि पानी की कमी न हो।  

*बाघ ने आधे घंटे तक ली वाटरहोल में डुबकी*  
शनिवार को दक्षिण सोनारीपुर रेंज में गश्त कर रही टीम ने देखा कि एक वयस्क बाघ दोपहर में वाटरहोल में उतरकर आधे घंटे से अधिक समय तक पानी में बैठा रहा। उसने पहले जी भरकर पानी पिया, फिर गर्दन तक डुबकी लगाकर शरीर ठंडा किया। डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार ने इस दुर्लभ दृश्य को कैमरे में कैद किया। वीडियो में बाघ के आसपास बारहसिंघों का झुंड भी पानी पीता दिखा, लेकिन बाघ ने कोई आक्रामकता नहीं दिखाई।  

*गर्मी में बदला वन्यजीवों का व्यवहार*  
अधिकारियों के अनुसार गर्मी में वन्यजीवों का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। बाघ-तेंदुए जैसे शिकारी जानवर भी दिन में शिकार के बजाय पानी के पास छाया में आराम करना पसंद करते हैं। रात में तापमान गिरने के बाद ही वे भोजन की तलाश में निकलते हैं। जंगली हाथी सुबह-शाम वाटरहोल्स में घंटों जलक्रीड़ा करते हैं और मिट्टी का लेप लगाकर शरीर ठंडा रखते हैं।  

*ट्रैप कैमरे और टैंकरों से निगरानी*  
वन विभाग ने वाटरहोल्स के पास ट्रैप कैमरे लगाकर निगरानी शुरू कर दी है। हर रेंज में गश्ती दलों को अलर्ट पर रखा गया है कि जहां पानी कम हो, वहां तुरंत टैंकर से आपूर्ति की जाए। पिछले एक सप्ताह में ही 50 से अधिक टैंकर पानी वाटरहोल्स में डाला गया है।  

फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है। पानी की कमी से डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए दुधवा प्रबंधन ने वाटरहोल्स को रिजर्व की लाइफलाइन मानकर काम शुरू किया है।  

प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि सफारी या जंगल के किनारे जाने पर वाटरहोल्स के पास शोर-शराबा न करें, प्लास्टिक कचरा न फेंकें और वन्यजीवों को पानी पीने के दौरान डिस्टर्ब न करें।

Related Articles

Comments

Back to Top