ठेका प्रथा से श्रमिकों के अधिकार असुरक्षित। 25 साल से सरकारों ने बढ़ाया शोषण

लखीमपुर खीरी , 20

अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर चंदन लाल वाल्मीकि ने उठाए सवाल 

सफाई कर्मियों के हक की लड़ाई का एलान

 

( शाजिफ हुसैन )


लखीमपुर खीरी। अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर श्रमिकों और वंचितों के राष्ट्रीय नेता चंदन लाल वाल्मीकि ने ठेका प्रथा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश की सरकारों ने विगत 25 वर्षों से ठेका प्रथा को बढ़ावा देकर श्रमिकों के अधिकार को असुरक्षित किया है।

चंदन लाल वाल्मीकि ने कहा कि आज जब देश डिजिटल इंडिया और विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। वहीं समाज का एक बड़ा हिस्सा विशेषकर सफाई पेशे में लगे वाल्मीकि हेला धानुक सुदर्शन डोम डुमार बसोर बांसफोर मखियार घसिया हरी हाड़ी भुईयां समुदाय ठेका प्रथा के मकड़जाल में फंसकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि शहरों को चकाचक साफ सुथरा रखने वाले और कोरोना काल के दौरान अपनी जान की बाजी लगाने वाले सफाई कर्मी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ठेका प्रथा ने इनके शोषण को और बढ़ा दिया है। न स्थायी नौकरी है न सामाजिक सुरक्षा है। न ही सम्मानजनक वेतन मिलता है।

चंदन लाल वाल्मीकि ने मांग की कि सरकार ठेका प्रथा को तुरंत समाप्त करे। सफाई कर्मियों को स्थायी नौकरी दी जाए। उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी हो। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने श्रमिकों की आवाज नहीं सुनी तो राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन होगा।


ठेका प्रथा बंद हो। सफाई कर्मियों को मिले स्थायी नौकरी

श्रमिक नेता चंदन लाल वाल्मीकि ने कहा कि ठेका प्रथा श्रमिकों के लिए अभिशाप बन गई है। डिजिटल इंडिया का सपना तब तक अधूरा है जब तक सफाई कर्मियों को उनका हक नहीं मिलता।

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