मुख्यमंत्री मियापुर में सौंपेंगे अधिकार पत्र; सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, तैयारियों के बीच मीडिया में नाराजगी

लखीमपुर खीरी , 40

मोहम्मदी-खीरी।
​उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 11 अप्रैल को जनपद लखीमपुर खीरी की मोहम्मदी तहसील के अंतर्गत मियापुर कॉलोनी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री पाकिस्तान से विस्थापित होकर यहाँ बसे लगभग ढाई हजार बंगाली परिवारों को उनके जमीन के अधिकार पत्र और 'मुख्यमंत्री आवास योजना' के तहत आवास की चाबियाँ सौंपेंगे। साथ ही, वे क्षेत्र के लिए कई अन्य विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी करेंगे।
​प्रशासन ने झोंकी ताकत, आईजी ने ली बैठक
​मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पिछले तीन दिनों से मियापुर में डेरा डाले हुए है। शुक्रवार को आईजी (IG) ने कमिश्नर, जिलाधिकारी (DM) खीरी, पुलिस अधीक्षक (SP) खीरी, मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। आईजी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को ब्रीफिंग देते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम को सकुशल संपन्न कराने के कड़े निर्देश दिए।
​कार्यक्रम की रूपरेखा और व्यवस्थाएं
​आगमन: मुख्यमंत्री दोपहर 1:00 बजे हेलीकॉप्टर से मियापुर गाँव पहुँचेंगे।
​अवधि: मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर लगभग एक घंटा मौजूद रहेंगे, जिसके बाद वे लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।
​पार्किंग व्यवस्था: * मोहम्मदी, पसगवां और मितौली विकास खंड से आने वाले वाहनों के लिए अलग पार्किंग बनाई गई है।
​गोला और अन्य क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए सरकारी तंत्र द्वारा दूसरी दिशा में पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
​पंडाल: जनसभा के लिए भव्य और आकर्षक पंडाल तैयार किया जा चुका है।
​मीडिया की अनदेखी से पत्रकारों में रोष
​एक तरफ जहाँ सरकारी तंत्र कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मीडिया कर्मियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि क्षेत्रीय विधायक या संगठन के किसी भी जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा मीडिया को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संबंध में न तो कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है और न ही आमंत्रित किया गया है। सूचना के अभाव और इस उपेक्षा को लेकर पत्रकारों में खासा रोष व्याप्त है।
​ऐतिहासिक होगा 'अधिकार पत्र' वितरण
​मियापुर में रह रहे बंगाली समुदाय के लिए यह दिन ऐतिहासिक होने वाला है। दशकों से अपने हक का इंतजार कर रहे परिवारों को मुख्यमंत्री के हाथों मालिकाना हक और छत मिलना, आगामी चुनावों और क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।

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