बंद चल रहे धर्मस्थलों के खुले दरवाजे, खिले भक्तों के चेहरे

जनपत की खबर , 648

शिकोहाबादः ढाई महीने के लंबे इंतजार के बाद सोमवार को धार्मिक स्थल खुले तो आस्था का स्वरूप भी बदला नजर आया। मंदिरों में लंबी कतारेें नहीं । तो जयकारे के बीच घंटे की आवाज भी गुम हो चुकी थी। मस्जिद में जमातों की भीड़ नजर नहीं आई तो गुरुद्वारे में हेड ग्रंथी द्वारा प्रकाश के साथ गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेकने वालों की संख्या भी प्रशासन के अनुरूप नजर आई। गिरजाघर भी खुले ,लेकिन प्रार्थना फादर ही करा सके। श्रद्धालुओं के लिए बंद मंदिरों के कपाट 73 दिन बाद खुल गए। मंदिरों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं के चेहरे खिल उठे। मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए आम श्रद्धालुओं को अभी इंतजार करना पड़ेगा।
बडा बाजार के काली देवी मंदिर में भी सुबह से ही पांच पांच श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ तो देर शाम तक चलता रहा। सैनिटाइजर का प्रयोग करा रहे हैं तो मास्क के बगैर श्रद्धालुओं को अंदर जाने से रोका गया। गोले के बीच बाहर से श्रद्धालु दर्शन कर रहे थे। मुख्य पुजारी ज्योति तिवारी श्रद्धालुओं से दूरी बनाए रखने की अपील करती नजर आ रही थी। हनुमान मंदिर में शारीरिक दूरी बना कर मास्क लगाए श्रद्धालु बारी-बारी से दर्शन करते नजर आए। प्रसाद और फूल के बगैर दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं ने बाबा से कोरोना मुक्ति की कामना भी की। वहीं महादेव चैमुखी मदिंर, बालाजी मदिंर, टुईया वाला मदिंर सहित कई मदिंरो मे पांच पांच ही भक्त प्रवेश कर रहे थे। ं
मस्जिदों में पांच ने पढ़ी नमाज , नहीं दिखी जमात
प्रशासन के प्रतिबंध का असर मस्जिदों में भी नजर आया। सराय वाली मस्जिद के मौलना हबीब अशरफ ने पांच लोगों के साथ नमाज पढ़ी। जमात के साथ नमाज न पढ़ने की अपील का असर भी यहां के साथ अन्य मस्जिदों में भी नजर आया। शिया धर्म गुरु मौलाना अबुजर अब्बास  की अपील का असर भी इमामबाड़े की मस्जिद के साथ अन्य मस्जिदों में भी दिखाई दिया। पांच नमाजी ही नमाज पढ़ते नजर आए। नाईयों वाली मस्जिद में भी पांच नमाजी ही नजर आए। शहर की अन्य छोटी बड़ी मस्जिदों में भी सन्नाटा नजर आया।


 

Related Articles

Comments

Back to Top