माघ मेले में सीएम योगी का संदेश: बांटने वाली राजनीति से सावधान रहें, सनातन की एकता ही भारत की शक्ति

जनपत की खबर , 118

प्रयागराज।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को माघ मेले में आयोजित श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के 726वें प्राकट्य महोत्सव में शामिल हुए और सनातन धर्म, सामाजिक एकता तथा राष्ट्रीय चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेकुलरिज्म के नाम पर समाज को बांटने वाली राजनीति पर तीखा प्रहार करते हुए लोगों से सतर्क रहने का आह्वान किया।
सीएम योगी ने कहा कि जाति, मत और संप्रदाय के आधार पर समाज को विभाजित करना हमारे लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है, जैसा कि आज बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वहां की घटनाओं पर तथाकथित सेकुलर ठेकेदार पूरी तरह मौन हैं। हिंदू समाज और सनातन धर्म को कमजोर करने में जुटे लोग बांग्लादेश में कमजोर और दलित हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर न तो बोल रहे हैं और न ही कोई कैंडल मार्च निकाल रहे हैं। यह स्थिति हम सभी के लिए चेतावनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग समाज को बांटने का काम करते हैं, वे कभी भी देश और समाज के हितैषी नहीं हो सकते। सत्ता में रहते हुए वे केवल अपने परिवार तक सीमित सोच रखते थे और अवसर मिलने पर फिर वही करेंगे—पहचान का संकट, अराजकता, सनातन धर्म पर प्रहार और दंगों की आड़ में आम जन को झुलसाने का कार्य। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार सनातन आस्था को मजबूती देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बांटने, तोड़ने और कमजोर करने वाली ताकतों को पनपने नहीं देना होगा।
सीएम योगी ने कहा कि आने वाला समय सनातन धर्म का है। जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर पर ध्वज लहरा रहा है, उसी प्रकार दुनिया भर में सनातन धर्म का झंडा फहराएगा। तब कोई भी बांग्लादेश में कमजोर और दलित हिंदुओं पर अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं कर पाएगा।
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज की पावन धरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भूमि को महर्षि भारद्वाज, महर्षि वाल्मीकि सहित अनेक ऋषियों ने अपनी तपस्या से सनातन धर्म का केंद्र बनाया। त्रिवेणी संगम की यह पावन भूमि, जहां मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती का संगम है, धर्म, न्याय और ज्ञान की त्रिवेणी है। देश-दुनिया से श्रद्धालु यहां आकर संगम में स्नान करते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि 726 वर्ष पूर्व इसी धरती पर भक्ति शिरोमणि जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी का प्राकट्य हुआ। उन्होंने बंटे हुए समाज को जोड़ने का महान कार्य किया। रामानंदाचार्य जी ने विभिन्न जातियों और वर्गों से द्वादश शिष्य—जिनमें कबीरदास जी, संत रविदास जी, पीपा जी, धन्ना जी और सैन जी जैसे संत शामिल हैं—बनाकर सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी परंपरा से निकली विभिन्न धाराएं आज भी समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने संत समाज से आह्वान किया कि दारागंज में जिस स्थल पर रामानंदाचार्य जी का प्राकट्य हुआ था, वहां उनके स्मारक और मंदिर के निर्माण के लिए सरकार पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि संत समाज जब एक मंच पर एकजुट होकर उद्घोष करता है, तो उसके सकारात्मक परिणाम अवश्य सामने आते हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संतों की साधना और एकता का ही परिणाम है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार रूप दिया।
सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने राम मंदिर का दर्शन किया, शिलान्यास से लेकर प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण तक हर ऐतिहासिक क्षण में सहभागिता निभाई। उन्होंने कहा कि सच्ची इच्छाशक्ति से ही बड़े कार्य संभव होते हैं।
मुख्यमंत्री ने माघ मेले में त्रिवेणी संगम में स्नान कर मां गंगा, यमुना और सरस्वती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पौष पूर्णिमा पर 31 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया, जबकि पिछले पांच-छह दिनों में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। संतोषाचार्य जी महाराज ‘सतुआ बाबा’ ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, सिद्धार्थ नाथ सिंह, हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, दीपक पटेल, गुरु प्रसाद मौर्य, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं देशभर से आए संत-महात्मा उपस्थित रहे।

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