फतेहपुर बना प्रदेश का पहला जिला, एआई आधारित एप से बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल

जनपत की खबर , 95

लखनऊ।
योगी सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़कर अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में फतेहपुर जिले ने एक मिसाल पेश की है। जिले में एआई आधारित ‘स्मार्ट वैक्सीनेशन ट्रैकिंग सिस्टम’ विकसित कर बच्चों के टीकाकरण की प्रभावी निगरानी शुरू की गई है।
इस अभिनव पहल के साथ फतेहपुर प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य को हासिल करने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल इस सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आकांक्षात्मक ब्लॉक हथगाम में एक सितंबर से लागू किया गया है। सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे पूरे जिले में विस्तार देने की तैयारी की जा रही है। इस एप के माध्यम से ब्लॉक में टीकाकरण की दर बढ़कर लगभग 95 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
फतेहपुर के जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के विजन को ध्यान में रखते हुए बच्चों के टीकाकरण की निगरानी के लिए यह एआई आधारित एप विकसित किया गया है। एप के माध्यम से नवजात शिशुओं और बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उनके अभिभावकों को समय पर व्हाट्सएप के जरिए उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही आसपास आयोजित होने वाले वीएचएनडी (विलेज हेल्थ एंड न्यूट्रिशन डे) सत्रों की सूचना भी दी जा रही है, जिससे अभिभावक समय रहते अपने बच्चों का टीकाकरण करा सकें।
डीएम रविंद्र सिंह ने बताया कि इस एप की सबसे बड़ी खासियत एआई तकनीक के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग और डेटा एनालिसिस है। इसके माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान आसानी से की जा रही है, जहां टीकाकरण की दर कम है या बच्चे किसी कारणवश टीकाकरण से वंचित रह जा रहे हैं। एआई आधारित विश्लेषण से न केवल समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान हो रही है, बल्कि उसके कारणों को भी चिन्हित कर त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
एप के जरिये टीकाकरण से पहले माताओं को स्वतः रिमाइंडर संदेश भेजे जाते हैं, जिससे भूल या जानकारी के अभाव में टीकाकरण छूटने की समस्या को प्रभावी ढंग से रोका जा रहा है। इसके अलावा टीकों की मांग और आपूर्ति प्रबंधन भी इस सिस्टम के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एएनएम के लिए एक अलग मोबाइल एप भी विकसित किया गया है। इसमें एएनएम को रियल टाइम ड्यू लिस्ट उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें यह स्पष्ट जानकारी मिलती है कि किस क्षेत्र में किन बच्चों का टीकाकरण शेष है। साथ ही ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) तकनीक के माध्यम से केवल एमसीपी कार्ड की फोटो अपलोड कर बच्चे का टीकाकरण स्टेटस अपडेट किया जा रहा है। इससे मैनुअल एंट्री में होने वाली त्रुटियों में कमी आई है और कार्य की गति भी तेज हुई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि एआई आधारित एप के विकास से पहले स्वास्थ्य विभाग, आमजन और डब्ल्यूएचओ से संवाद स्थापित किया गया था। सभी के सुझावों को शामिल करते हुए एक ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जो व्यवहारिक होने के साथ-साथ अत्यंत प्रभावी भी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा अपने पहले वर्ष में आवश्यक टीकों से वंचित न रह जाए।

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