KGMU लव जिहाद–धर्मांतरण मामला: आरोपी गिरफ्तार, अपर्णा यादव की एंट्री से हाई वोल्टेज ड्रामा, FIR की तैयारी

जनपत की खबर , 127

लखनऊ।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में लव जिहाद और धर्मांतरण के आरोपों से जुड़ा मामला अब हाई वोल्टेज ड्रामा का रूप ले चुका है। शुक्रवार को दिनभर चले हंगामे के बाद लखनऊ पुलिस ने शाम को आरोपी सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, KGMU प्रशासन की ओर से चौक थाने में पूरे प्रकरण को लेकर तहरीर भी दी गई।
मामला बढ़ने के बीच शुक्रवार रात महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं। बताया गया कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से तलब किया गया था। राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंचने के बाद शनिवार को भी दोनों पक्षों के बीच जोर-आजमाइश की संभावना जताई जा रही है।
KGMU कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कुलाधिपति एवं राज्यपाल से भेंट के लिए समय मांगा है, जो शनिवार को संभव है। वहीं, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक तक शिकायत पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय के डॉक्टरों में आक्रोश बढ़ता दिखाई दे रहा है।
KGMU प्रशासन के अनुसार, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ शिकायत सामने आने के बाद विशाखा कमेटी से जांच कराई गई। करीब 15 दिन की जांच के बाद कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी का दाखिला रद्द करने का निर्णय लिया गया और चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (DGME) को बर्खास्तगी की संस्तुति भेजी गई।
इस कार्रवाई के बाद शुक्रवार को कुलपति के चैंबर के बाहर अचानक भीड़ जुट गई। आरोप है कि अपर्णा यादव बिना पूर्व सूचना अपने करीब 200 समर्थकों के साथ परिसर में प्रवेश कर गईं। कुलपति ने अकेले मिलने का अनुरोध किया, लेकिन समर्थकों के साथ ही मुलाकात पर अड़े रहने के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन का आरोप है कि भीड़ ने जबरन कुलपति कार्यालय में प्रवेश किया, प्रशासनिक कक्षों में तोड़-फोड़ की और नारेबाजी शुरू कर दी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुलपति को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया और राज्यपाल, मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री कार्यालय को सूचना दी गई। इसके बाद भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति पर काबू पाया गया, हालांकि इस दौरान विश्वविद्यालय में चल रही परीक्षाएं भी प्रभावित हुईं।
KGMU के प्रवक्ता एवं डीन पैरामेडिक्स डॉ. केके सिंह ने बताया कि चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा की ओर से चौक थाने में तहरीर दी गई है। तहरीर में सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, महिला शिक्षकों के साथ अभद्रता, छात्रों की परीक्षा में व्यवधान और परिसर में भय का माहौल पैदा करने के आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने की मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई न होने की स्थिति में डॉक्टर कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
वहीं, अपर्णा यादव का आरोप है कि आरोपी को बचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने विशाखा कमेटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कमेटी के कुछ सदस्य स्वयं गंभीर मामलों में आरोपित हैं। उनका यह भी कहना है कि जांच के दौरान पीड़िता से महिला आयोग जाने को लेकर सवाल पूछे गए, जो अनुचित है।
अपर्णा यादव ने KGMU में विशाखा कमेटी द्वारा अन्य मामलों में भी दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के एक विवाद का हवाला दिया।
उधर, विशाखा कमेटी की अध्यक्ष मोनिका कोहली ने स्पष्ट किया कि कमेटी ने करीब 15 दिनों तक लगातार बैठकों के जरिए जांच की। इस दौरान 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए और मामले की गहन जांच के बाद रिपोर्ट कुलपति को सौंपी गई।
KGMU प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार किसी पीजी रेजिडेंट का दाखिला रद्द किया गया है और पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा करना अनुचित है। फिलहाल मामला प्रशासनिक, राजनीतिक और कानूनी स्तर पर लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

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