बिना नोटिस राष्ट्रीय सहारा हिंदी दैनिक बंद, बकाया वेतन व ग्रेच्युटी को लेकर कर्मचारियों ने श्रम विभाग में दी शिकायत

जनपत की खबर , 158

लखनऊ। राष्ट्रीय सहारा हिंदी दैनिक और सहारा इंडिया टावर से जुड़े कर्मचारियों ने बिना पूर्व सूचना अख़बार बंद किए जाने और बकाया वेतन, ग्रेच्युटी व पीएफ का भुगतान न होने का आरोप लगाते हुए श्रम विभाग का दरवाज़ा खटखटाया है। इस संबंध में कर्मचारियों ने अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र को औपचारिक शिकायत सौंपी है।
शिकायत में बताया गया है कि राष्ट्रीय सहारा वर्ष 1992 से लगातार प्रकाशित हो रहा था, लेकिन 8 जनवरी 2026 को बिना किसी पूर्व नोटिस के इसका प्रकाशन अचानक रोक दिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2014 के बाद से नियमित वेतन वृद्धि नहीं की गई, वहीं नवंबर 2011 से कई-कई महीनों तक वेतन भुगतान लंबित रहा। इसके बावजूद कर्मचारियों से लगातार कार्य कराया जाता रहा।
दस्तावेज़ों के अनुसार, कर्मचारियों को जारी किए गए आयकर फॉर्म-16 में वेतन भुगतान दर्शाया गया, जबकि वास्तव में संबंधित राशि का भुगतान नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए अचानक अख़बार बंद करने का फैसला लिया, जिससे सैकड़ों कर्मचारी बेरोज़गार हो गए।
मामले में अपर श्रमायुक्त कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए 12 जनवरी 2026 को अपराह्न 3 बजे सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। इस संबंध में सहारा इंडिया मीडिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों—सीईओ सुमित राय, यूनिट हेड अजीत बाजपेयी और प्रशासनिक हेड डेरिक एस. गोडिन—सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि संस्थान पर प्रति कर्मचारी लाखों रुपये का वेतन, ग्रेच्युटी और पीएफ बकाया है। साथ ही भारत सरकार के श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
कर्मचारियों और मीडिया कर्मियों ने श्रम विभाग से न्याय की मांग करते हुए बकाया भुगतान सुनिश्चित कराने और अख़बार को अवैध तरीके से बंद किए जाने के मामले में सख़्त कार्रवाई की अपील की है।

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