लखनऊ स्पेक्ट्रम-2025: कला, शिक्षा और रचनात्मक अनुभवों का जीवंत संगम

जनपत की खबर , 147

लखनऊ। नवंबर का महीना लखनऊ में रंगों और रचनात्मकता का उत्सव लेकर आया, जब फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी ने अपनी महीनेभर चलने वाली आर्ट फेयर ‘लखनऊ स्पेक्ट्रम-2025’ का सफल आयोजन 1 से 30 नवंबर तक किया। गैलरी की संस्थापक-निदेशक नेहा सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुई यह प्रदर्शनी न केवल शहर बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए एक जीवंत मंच साबित हुई, जहाँ कलाकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, कला-प्रेमियों और कला-संग्रहकर्ताओं ने समकालीन, लोक, पारंपरिक और जनजातीय भारतीय कला की विविधता को करीब से अनुभव किया।

क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना और राजेश कुमार ने बताया कि स्पेक्ट्रम का उद्देश्य युवा मनों को पाठ्यपुस्तक से परे कला-अभिव्यक्ति की दुनिया से जोड़ना था। विद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ किए गए सार्थक सहयोग ने औपचारिक शिक्षा और दृश्य कलाओं के अनुभवात्मक पक्ष के बीच एक सार्थक सेतु का निर्माण किया।

प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण शहर और आसपास के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के समूह थे। इनमें एलपीएस वृंदावन योजना के 35, एसआर ग्लोबल स्कूल बक्शी का तालाब के 280, और विद्याज्ञान स्कूल सीतापुर के 30 विद्यार्थी शामिल रहे। वे अपनी कला शिक्षिकाओं श्रीमती सोनी चौरसिया, संदीप कुमार, तथा प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि चड्ढा और रघुनाथ जेना के नेतृत्व में पहुँचे। प्रदर्शनी का अवलोकन प्रधानाचार्या रवनीत नागी, विंग इंचार्ज श्रीमती नंदिता और वरिष्ठ रसायन विज्ञान शिक्षिका श्रीमती नागी ने भी किया।

कई विद्यार्थियों के लिए यह अपनी तरह की पहली विशाल कला प्रदर्शनी थी, जिसने उनमें उत्सुकता, रोमांच और जिज्ञासा को जन्म दिया। गैलरी में घूमते हुए विद्यार्थियों ने अभिव्यक्तिपूर्ण चित्रों, सूक्ष्म मूर्तियों, प्रयोगधर्मी इंस्टॉलेशनों और मिश्रित-माध्यम कृतियों का अवलोकन किया और उन्हें अपनी नोटबुक में दर्ज किया। शिक्षक उन्हें तकनीकों, विधाओं और विषयों को समझने में मार्गदर्शन देते रहे।

क्यूरेटर राजेश कुमार ने बताया कि इसी दौरान प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि चड्ढा ने अपने भावनापूर्ण विचार साझा करते हुए कहा, “विद्यार्थियों को कलाकृतियों से इस तरह गहराई से जुड़ता देखना अत्यंत सुखद रहा। उनकी जिज्ञासा और चिंतन क्षमता बताती है कि कला युवा कल्पनाओं को कितना समृद्ध कर सकती है। मैं गैलरी की पूरी टीम की आभारी हूँ, जिन्होंने छात्रों का स्नेहपूर्ण स्वागत किया।”

इस आयोजन में फीनिक्स प्लासियो टीम, विशेषकर निदेशक संजीन शरीन, का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा। कला और शिक्षा के इस संगम ने सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देने में सामुदायिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

संस्थापक-निदेशक नेहा सिंह ने लखनऊ स्पेक्ट्रम को एक ‘लर्निंग गैलरी’ के रूप में परिकल्पित किया—जहाँ बच्चे कल्पना की असीम संभावनाओं को खोज सकें। उनका मानना है कि कला का प्रारंभिक अनुभव बच्चों की रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को गहराई से प्रभावित करता है।

दौरे के अंत में छात्रों ने समूह-चर्चा में हिस्सा लिया और अपनी पसंदीदा कलाकृतियों व प्रेरणाओं को साझा किया। उनकी प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट था कि यह अनुभव उनके लिए रूपांतरकारी साबित हुआ। पूरे महीने स्पेक्ट्रम को शिक्षकों, कलाकारों और आगंतुकों से व्यापक सराहना मिली।

रविवार को अर्बन स्केचर्स आर्टिस्ट टीम द्वारा आयोजित ऑन द स्पॉट स्केच पेंटिंग वर्कशॉप भी चर्चा का केंद्र रही।

सार रूप में, लखनऊ स्पेक्ट्रम-2025 कला और शिक्षा का ऐसा जीवंत संगम बना, जिसने विद्यार्थियों को सपने देखने, प्रश्न पूछने और रचनात्मकता को नए आयाम देने का अवसर प्रदान किया। यह पहल निश्चय ही युवा पीढ़ी को कला-सचेत और रचनात्मक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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