अदभुत घड़ी: उल्कापिंडो से बनी घड़ी 

हेडलाइंस , 802

अमरेन्द्र सहाय अमर 
आज कल समय की जानकारी के लिए बहुत से साधन हैं,  जैसे मोबाइल, दीवाल घड़ी, अलार्म वाच, टेबल वाच आदि. लेकिन समय की जानकारी देने के लिए रिस्ट वाच यानि कलाई घड़ी कीआज भी कोई सानी नहीं .इसे अपनी कलाई में बंधना लोग अपनी न सिर्फ शान समझते है अपितु अपनेदैनिक कार्यक्रम  का शेडयूल बनाने में बड़ी सहायता मिलती है.
एक वक़्त था जब विज्ञान इतना विकसित नहीं था. तब भी लोग समय की जानकारी करते थे.प्राचीन काल में लोग आसमान के सूर्य की स्थिति को देख कर समय की जानकारी करते थे. मतलब जब सूर्य की छायाकिसी वस्तु , स्तम्भ या दीवाल से गुजरती थी तो एक छाया बनती थी. जैसे ही पृथ्वी के घूमने के कारण सूर्य आकाश में अपनी दिशा बदलता छाया की लम्बाई भी बदल जाती. आगे चल कर  इसी आधार पर सूर्य घड़ी बनाई गई. पहली यांत्रिक घड़ी का निर्माण वर्ष1300के दशक में हुआ था. वर्ष1500 में के दशक में कुंडलित स्प्रिंग और झूलते वजन द्वारा संचालित घड़िया प्रचलन में आई थी, जो आज भी अपने विकसित रूप में हमारी दीवालों पर देखी जा सकती हैं. वर्ष1800के अंतिम दशक और वर्ष 1900 के प्रारंभिक दशक में बिजली चालित घड़ियाँ प्रचलन में आई. यह आज भी प्रचलित हैं. वर्ष1950 के दशक में परमाणु घड़ी का विकास हुआ जो सबसे सटीक समय बताने वाली घड़ी मानी जाती है .
घड़िया किसी न किसी धातु से बनती हैं जैसे मिश्रित धातु, स्टील, सोना, चांदी, हीरा आदि. चमड़े से भी घड़ी बनाई जाती है. लेकिन अभी स्विट्जरलैंड की एक कम्पनी एटेलियर्स लुइस मोइनेट ने एक ऐसी घड़ी बनाई है जिसमे उल्कापिंडो के टुकड़ों का प्रयोग किया गया है. इस घड़ी का नाम है कास्मोपोलिस. इसकीडिजाइन तैयार करने में ख़ास सावधानी बरती गई. 18 कैरेट रोज़ गोल्ड के केस के रूप में सेलेक्ट किया गया .इसके बाद बेहद सावधानी पूर्वक उल्कापिंडो को काटकर इसमें लगाया गया. इसकी कीमत है भारतीय मुद्रा में दो करोड़ रूपये .
इस घड़ी की खासियत यह है इसमें12 उल्कापिंडो के पत्थरों को जोड़ा गया है .बताया जाता है कि यह उल्कापिंड चंद्रमा, मंगल से लेकर अन्तरिक्ष के कई हिस्सों से आकर पृथ्वी पर आकर गिरे थे. कम्पनी ने यह घड़ी बनाकर दुनिया के लोगो को हैरान कर दिया  इसे गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में सम्मिलित किया गया है.

एक रिपोर्ट के अनुसार इस घड़ी में चंद्रमा  के उल्कापिंड ढोफर 461, मंगलग्रह के उल्कापिंड ढोफर 1674के टुकड़े लगाये गये हैं. ढोफर 1674 ओमान के पास पाया गया था. यह मंगल ग्रह के सबसे दुर्लभ उल्कापिंडो में से एक है जिसके बनावट हलके हरे रंग की है. इसके अलावा इस घड़ी में एलेंडे नाम के एक उल्कापिंड का टुकड़ा भी लगाया गया है, यह मेक्सिको में मिला था. इस उल्कापिंड के बारे में अनुमान यह लगाया गया है कि  यह4,567 अरब साल पुराना है और सौरमंडल का सबसे पुराना और दुर्लभ उल्का पिंड में से एक है.

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