दुधवा तिराहा-बायपास मार्ग पर विकास के नाम पर 'विनाश'
लखीमपुर खीरी Apr 14, 2026 at 06:13 PM , 22अधूरी सड़क और धूल के गुबार ने नागरिकों का जीना किया मुहाल
लखीमपुर खीरी। पलिया शहर के दुधवा तिराहे से बायपास रोड पर चल रहा सड़क चौड़ीकरण का कार्य स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही और अव्यवस्था के कारण स्थिति यह है कि लोगों का अपने घरों से निकलना और दुकानदारी करना दूभर हो गया है।
अधूरा काम और मिट्टी के ढेर: 'नरक' बनी जिंदगी
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने सड़क के एक तरफ का काम अधूरा छोड़कर दूसरी तरफ खुदाई शुरू कर दी है। जेसीबी (JCB) द्वारा खोदी गई मिट्टी को बेतरतीब तरीके से दुकानों और घरों के सामने डाल दिया जा रहा है।
प्रभावित वर्ग: सबसे बुरा असर सड़क किनारे ठेला-रेहड़ी लगाने वाले छोटे व्यापारियों, फल विक्रेताओं और रेडीमेड गारमेंट्स बेचने वालों पर पड़ा है, जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो गई है।
निजी खर्च पर सफाई: निर्माण टीम से बार-बार अनुरोध के बावजूद मिट्टी नहीं हटाई जा रही, जिसके चलते दुकानदार मजबूरन अपनी लेबर लगाकर दुकानों के सामने से मलबा हटवा रहे हैं।
सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी पूर्व सूचना के नगर पालिका द्वारा बनाए गए पक्के क्रॉस और पहले से लगी इंटरलॉकिंग टाइल्स को जेसीबी से उखाड़ दिया गया है। दुकानदार अब मिट्टी में दबी अपनी ईंटों और टाइल्स को खुद की लेबर लगाकर निकालने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
बढ़ती गर्मी और स्वास्थ्य का खतरा
अभी गर्मी का मौसम शुरू ही हुआ है, लेकिन उड़ती धूल ने लोगों का दम घोंटना शुरू कर दिया है।
"आने वाले दिनों में लू और तेज हवाओं के कारण यह धूल फेफड़ों की बीमारी और आंखों में संक्रमण का कारण बनेगी। प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।" — एक स्थानीय निवासी
प्रशासन से मुख्य मांगें:
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
खोदी गई मिट्टी को तत्काल प्रभाव से सड़क किनारे से हटाया जाए।
निर्माण स्थल पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए ताकि धूल न उड़े।
काम को टुकड़ों में छोड़ने के बजाय एक तरफ का कार्य पूरा कर दूसरी तरफ शुरू किया जाए।
सार्वजनिक संपत्ति और नागरिकों के निजी रास्तों को नुकसान पहुंचाने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
निष्कर्ष:
विकास जरूरी है, लेकिन जनता की सेहत और आजीविका की कीमत पर नहीं। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस दिशानिर्देश जारी नहीं किए, तो आने वाले दिनों में यह अव्यवस्था किसी बड़े जन-आक्रोश का रूप ले सकती है।































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