बंगाली विस्थापितों के लिए ऐतिहासिक सवेरा 6 दशक बाद मिला जमीन का मालिकाना हक
लखीमपुर खीरी Apr 09, 2026 at 08:30 PM , 28(हरिशंकर मिश्र/सुनील शर्मा)
लखीमपुर खीरी/पीलीभीत।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दशकों से विस्थापित जीवन जी रहे बंगाली हिंदू परिवारों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। लखीमपुर खीरी के उचौलिया थाना क्षेत्र स्थित मोहनपुर बंगाली कॉलोनी सहित पीलीभीत और अन्य जिलों के हजारों परिवारों को अब उनकी जमीन का असली मालिक (भूमिधरी अधिकार) बना दिया गया है। 1960 और 70 के दशक में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए इन विस्थापितों का 60 साल का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है।
कैबिनेट की मंजूरी से मिली नई पहचान
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे करीब 2500 से अधिक विस्थापित परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। अकेले पीलीभीत में 1466+ और लखीमपुर खीरी के मियांपुर व आसपास के क्षेत्रों में 300 से अधिक परिवारों को यह अधिकार दिया जा रहा है। सरकार के इस कदम से अब ये परिवार 'पट्टेदार' की जगह अपनी खेती की जमीन के 'कानूनी मालिक' बन गए हैं।
विकास के खुलेंगे नए द्वार
मालिकाना हक मिलने से इन परिवारों के लिए आर्थिक प्रगति के रास्ते खुल गए हैं:
बैंक लोन: अब ये अपनी जमीन पर बैंक से कृषि ऋण (KCC) या अन्य लोन आसानी से ले सकेंगे।
सरकारी योजनाएं: मालिकाना हक न होने के कारण जो परिवार अब तक पीएम आवास या अन्य कृषि योजनाओं से वंचित थे, वे अब इनके पात्र होंगे।
दस्तावेजीकरण: वर्तमान में प्रशासन द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन और पट्टों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया गया है।
छह दशकों के संघर्ष के बाद मिली इस राहत से बंगाली बस्तियों में उत्सव का माहौल है। दशकों से अस्थाई तौर पर रह रहे इन परिवारों के लिए यह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके सम्मान और पहचान की बहाली है।































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