विपक्ष हार के डर से अभी से खोज रहा है बहाने : डा दिनेश शर्मा
जनपत की खबर Jan 09, 2022 at 09:14 PM , 339पहले ईवीएम पर तोहमत मढते थे तो अब डिजिटल खतरा हो गया
10 मार्च विपक्ष की विदाई और भाजपा के लिए बधाई का दिन
जनविश्वास यात्राओं में उमडे जन सैलाब को देखकर विपक्ष को ठंड में भी आया पसीना
भाजपा के विकासवाद के आगे विपक्ष के परिवारवाद सम्प्रदायवाद क्षेत्रवाद जातिवाद हुए ढेर
येन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज होने का विपक्ष का मंसूबा नहीं पूरा होने वाला
लखनऊ। उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला और कहा कि विपक्ष विधानसभा चुनाव में हार के डर से अभी से बहाने खोजने लगा है। वे पहले ईवीएम पर तोहमत मढते थे तो अब डिजिटल खतरा हो गया है। उन्होंने कहा कि येन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज होने का विपक्ष का मंसूबा पूरा नहीं होने वाला है। 10 मार्च विपक्ष की विदाई और भाजपा के लिए बधाई का दिन होगा। उन्होंने कहा कि कहा कि भाजपा के विकासवाद के आगे विपक्ष के परिवारवाद सम्प्रदायवाद क्षेत्रवाद जातिवाद ढेर हो चुके हैं। चुनाव आते ही जाति धर्म और क्षेत्र के आधार पर लोगों को बांटकर जीत हासिल करने का विपक्ष का फार्मूला अब चलने वाला नहीं है। राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि करीब सात साल पूर्व से जो विकासवाद की अवधारणा आरंभ हुई है तथा केन्द्र और राज्य सरकार के समन्वय ने विपक्ष के परिवारवाद जैसे सभी प्रकार के वाद चलाकर जीतने वाले फार्मूले की धार कुंद कर दी है। अब प्रदेश में केवल विकासवाद ही चलेगा तथा उसी आधार पर भाजपा 2014 के बाद से प्रचंड बहुमत से सभी चुनावों में जीत हासिल कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा बसपा कांग्रेस सहित तमाम दलों के चुनाव चिन्ह भले ही अलग हैं पर इनका दिल दिमाग सिद्धान्त नीति उद्देश्य एक हैं। वे येन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं पर उनका यह सपना पूरा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि 10 मार्च विपक्ष की विदाई और भाजपा की बधाई की तिथि होगी। भाजपा अपना जीत का पिछला रिकार्ड भी तोडेगी। विधानसभा में विपक्ष के विधायकों की संख्या 2017 से भी कम हो जाएगी। डा शर्मा ने कहा कि भाजपा जाति के आधार पर कोई काम नहीं करती है। भाजपा ने सबका साथ सबका विकास के मंत्र के आधार पर सरकार चलाई है। इस दौरान हर वर्ग के लोगों के लिए काम हुआ है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है। विरोधी दल जाति और धर्म के आधार पर केवल चुनावी राजनीति के लिए गठजोड करते हैं। भाजपा ने सभी जातियों व धर्मों के लिए काम किया है। उनका कहना था कि भगवान परशुराम के नाम पर सड़क चौराहा पार्क व मूर्ति की स्थापना के तमाम कार्य भाजपा सरकार ने किए हैं। पार्टी के लिए वे आस्था का विषय हंै। भगवान राम और भगवान परशुराम दोनो ही भगवान विष्णु के अंश हैं। डा शर्मा ने कहा कि एक तरफ तो भगवान राम के मंदिर निर्माण में अडंगा डाला गया ,कार सेवकों पर गोली चलवाई ,भगवान राम के जन्म स्थान पर अस्पताल अथवा पंचायतघर बनाने की बात की , राम के अस्तित्व को कोर्ट में नकारने जैसी बातो से बहुसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुचाई तो दूसरी ओर चुनाव आते ही मौसमी रामभक्त हो गए। जनता यह सब देख रही है। इनकी दाल अब गलने वाली नहीं है इसलिए इनके दिल की धडकन बढ गई है। चुनाव की घोषणा के पूर्व कुछ दल तो सभा भी नहीं कर पाए। कुछ की सभाओं में भीड ही नहीं आई जबकि भाजपा की सभाओं ऐसा जन सैलाब उमडा जिसे देखकर विपक्ष को ठंड में भी पसीना छूट गया। भाजपा की जनविश्वास यात्राओं में आई भीड ने सरकार के प्रति जनता के भरोसे की पुष्टि कर दी है। इस बार की यात्राओं का स्वागत मतदाताओं के उस वर्ग ने भी किया जो भाजपा का परम्परागत मतदाता नहीं रहा है। सारा दृश्य अभूतपूर्व था। भाजपा को मिला यह जनसमर्थन विपक्ष की घबराहट का कारण है। इसीलिए आज वो अपनी हार के डर से पहले से ही बहाना खोज रहे हैं। पहले ईवीएम का बहाना था तो अब डिजिटल का खतरा आ गया है। उनका कहना था कि डिजिटल को स्वर्गीय राजीव गांधी जी की देन बताने वाली कांग्रेस और कुछ थोड़े से केवल एक बार लैपटाप बांटने का प्रचार करने वाली सपा ने डिजिटल महत्वपूर्ण नहीं समझा तैयारी नहीं की और अब चुनाव आयोग के निर्णय पर सवाल खडे कर रहे हैं। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। विपक्ष को हर संस्था पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। हार की संभावना को लेकर खीज हो सकती है पर इसके लिए संवैधानिक संस्था पर उंगली उठाकर विपक्ष नाच न जाने आंगन टेढा की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण एक बुद्धिजीवी समुदाय है। विरोधी दलों ने छद्मवेशधारी लोगों को आगे करके तमाम बगैर भीड़ वाले ब्राह्मण सम्मेलन किए थे तथा भाजपा के परम्परागत मतदाता को लु़भाने का प्रयास किया था। असल में ब्राह्मण जीवन जीने की एक पद्धति है जो दूसरों के कल्याण की मंशा रखता है। जो अपने देवी देवताओं के सम्मान के साथ ही भारत की संस्कृति को आगे बढाने का सदैव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज जो काशी में भव्य कारीडोर बना है तथा जो भव्य राम मंदिर बन रहा है उसके बारे में पूर्व की सरकारों ने कोई काम नहीं किया। राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट को श्रेय देने पर विपक्ष को आडे हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण में अडंगेबाजी करने वाले , कार सेवकों पर गोली चलवाने वालों को मंदिर निर्माण में बाधा डालने के लिए जनता को जवाब देना चाहिए। इन लोगों ने कोर्ट के आदेश का स्वागत तक नहीं किया। आज ऐसे लोगों के भी सुर बदले हुए हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी जी अखिलेश यादव जी और बसपा सुप्रीमों मायावती जी आज तक राम लला के दर्शन करने नहीं गए। उन्होंने कहा कि एक समय वह भी आया था तब थानों में जन्माष्टमी के आयोजन बन्द हो गए थे। भाजपा की सरकार के सत्ता में आने के बाद इस परम्परा को दोबारा आरंभ किया गया । उनका कहना था कि भगवान सबके हैं पर भगवान के नाम पर विभाजन करना एवं चुनाव के समय वर्ग विशेष को लांछित करना उचित नहीं है। आज तक विपक्ष के किसी भी नेता ने काशी में भव्य कारीडोर बनने एवं भव्य कुम्भ आयोजन की सराहना नहीं की है। किसी ने भी दीपोत्सव एवं रंगोत्सव में शामिल होने की मंशा नहीं जताई । वे डरते हैं कि अगर भारत की संस्कृति के प्रतिपादन वाले इन आयोजन में जाएंगे तो कही साम्प्रदायिक न कहलाने लगें। भाजपा के लिए विकास ही मुद्दा है। मथुरा का विकास भाजपा के एजेन्डे में हैं और इसके लिए काम आरंभ हुआ है। चित्रकूट विंध्याचल जैसे स्थलों का विकास विपक्ष की सरकारों में नहीं हुआ और जब भाजपा इनका विकास करा रही है तो उन्हे परेशानी हो रही है। प्रधानमंत्री ने जब काशी में मां गंगा में डुबकी लगाई तो उनके लिए विपक्ष के एक नेता ने अन्तिम शब्द का प्रयोग तक किया। देश के लोगों की शुभकामनायें प्रधानमंत्री के साथ है कि वे शतायु हों। एक दूसरे की आलोचना हो सकती है पर प्रधानमंत्री के जीवन को लेकर टिप्पणी उचित नहीं है। आज प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी विपक्ष निशाने पर है क्योंकि वे भारत की परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इसका बडा कारण भाजपा द्वारा बिना किसी भेदभाव के कराए गए कार्य भी हैं। अगर राशन दिया है तो उसमे हिन्दू मुस्लिम के आधार भेदभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सबसे अधिक सरकारी नौकरी भाजपा की सरकार ने दी है। साढे चार लाख लोगों को नौकरी बिना किसी विवाद के दी है। साढे तीन लाख लोगों की संविदा पर भर्ती की है। यह विपक्ष की घबराहट का कारण है क्योंकि वे सत्ता में रहने के दौरान नौकरी नहीं दे पाए। पौने पांच साल में एक भी दंगा नहीं हुआ है क्योंकि दंगाई जेल में थे। गरीबों की जमीनों पर कब्जा कर मकान बनाने वाले माफियाओं की बिल्डिंगों पर बुल्डोजर चल रहा है। उनके स्थान पर गरीबों के लिए मकान बन रहे हैं।































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