उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
जनपत की खबर Jul 25, 2020 at 10:56 PM , 499लखनऊ। सभी ऊर्जा निगमों में प्रबन्धन के मनमानेपन, द्वेषपूर्ण भावना एवं पूर्वाग्रह से अभियन्ताओं पर बड़े पैमाने पर की जा रही उत्पीड़नात्मक एवं दण्डात्मक कार्यवाहियों, जानबूझकर व नियम विरुद्ध ढंग से पदोन्नति आदेश रोके रखने, भय पैदा करने, नकारात्मक कार्य प्रणाली, ईआरपी एवं सलाहकारों के नाम पर हो रही फिजूलखर्ची समेत तमाम समस्याओं से आहत एवं आक्रोशित बिजली अभियन्ता उप्र राविप अभियन्ता संघ के बैनर तले प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक तरीके से आन्दोलन करने की घोषणा की है। इस आशय की नोटिस विद्युत अभियन्ता संघ ने शुक्रवार को पावर कारपोरेशन अध्यक्ष को प्रेषित कर दी है। नोटिस के अनुसार 31 जुलाई तक प्रबन्धन द्वारा 11 बिन्दुओं पर सार्थक कार्यवाही न की गयी तो आन्दोलनात्मक कार्यक्रमों की घोषणा कर दी जायेगी। विदित हो कि बड़े पैमाने पर अभियन्ताओं के विरूद्ध उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों से प्रदेश के अभियन्ताओं में रोष बढ़ रहा है एवं ऊर्जा निगमों में टकराव की स्थिति बन रही है। विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष वी.पी. सिंह एवं महासचिव प्रभात सिंह ने बयान जारी कर बताया कि विगत कुछ महीनों से लगभग सभी ऊर्जा निगमों के प्रबन्ध निदेशकों द्वारा बिजली अभियन्ताओं के प्रति द्वेषपूर्ण भावना एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर दण्डात्मक कार्यवाहियों एवं अनावश्यक जांचों का कुचक्र चलाकर अभियन्ताओं के मान-सम्मान और कैरियर से खिलवाड़ कर रहे है। ऊर्जा निगमों के प्रबन्धन का मनमानापन चरम पर पहुंच गया है एवं अभियन्ताओं के भी सहनशीलता समाप्ति की ओर है, पूरे निगम में बिजली अभियन्ताओं ने भय एवं निराशा का वातावरण है। उन्होंने कहाकि कोरोना काल के लाॅकडाउन में माह अप्रैल में 4-5 दिनों के विलम्ब से वेतन वितरण पर अभियन्ताओं की वेतन वृद्धियां रोक ली गयी हैं। परन्तु प्रबन्धन द्वारा विगत कुछ माहों में अभियन्ताओं को 20-25 तारीख को वेतन दिया गया है। प्रबन्धन अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ई-निविदा टेण्डरों की जांच हेतु सी.ए. आॅडिट व ए़.जी. आॅडिट होने के बाद में स्पेशल आॅडिट में भी कुछ खास खामियां न पाये जाने के उपरान्त भी प्रबन्धन द्वारा उत्पीड़न करने की दृष्टि से मनमाने ढंग से एन्टी थेफ्ट थानों, जिनका मुख्य कार्य बिजली चोरी रोकना है, द्वारा पूरे प्रदेश में सैकड़ों की तादाद में पुनः ई-निविदाओं की जांच के नाम पर इन एन्टी थेफ्ट बिजली थानों का दुरुपयोग करते हुए उपलब्ध पुलिस तंत्र को बिजली चोरी रोकने के मूल कार्यों से दूर करते हुए ई टेण्डर्स की जांच सहित तमाम जांचों में उपयोग किया जा रहा है। जिसके लिए यह विजिलेंस विंग विधिक रूप से अधिकृत नहीं है (सिविल प्रक्रिया को छोड़ते हुए)। इससे स्पष्ट होता है कि प्रबन्धन का मूल उद्देश्य बिजली चोरी रोकना न होकर अभियन्ताओं का उत्पीड़न करना है। अभियन्ताओं का अनावश्यक उत्पीड़न करने व उनका मनोबल गिराने का प्रबन्धन का यह प्रयास निहित स्वार्थों से प्रेरित प्रतीत होता है। यह स्वीकार्य नहीं है।पदाधिकारियों ने बताया कि प्रबन्धन द्वारा अभियन्ताओं को एक ओर राजस्व बढ़ाने, डाटा क्लीनिंग, पोर्टल अपडेट करने, कैम्प करने, रेड डालने, अव्यवहारिक रूप से लक्षित निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों को न्यूनतम से भी कम समय में पूर्ण करने हेतु ऐसे निर्देश दिये जा रहे हैं, जैसे प्रदेश में कोरोना जैसी कोई महामारी नहीं है। जबकि प्रदेश में लगभग 50000 कोरोना केसेस दर्ज हो चुके हैं एवं कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। प्रबन्धन की इन गलत नीतियों के कारण जहां एक ओर अभियन्ताओं एवं उनके परिजनों का जीवन संकट में है। वहीं कोरोना आपदा को अवसर में प्रयोग करते हुए ऊर्जा निगमों में फिजूलखर्ची, सरकारी धन की लूट व चाटुकारिता बढ़ गयी है। गैर कानूनी ढंग से रखे गये सलाहकारों की सलाह पर 30 जून को जारी होने वाले पदोन्नति आदेश अकारण रोक लिये गये हैं।
ऊर्जा निगमों के प्रबन्ध निदेशकों की गलत नीतियों, असमय एवं असीमित वीसी, अनावश्यक जांचों, पदोन्नति आदेश रोके रखने आदि तमाम उत्पीड़नात्मक एवं भयादोहन वाली कार्य प्रणाली से प्रदेश के सभी अभियन्ता मानसिक तनाव में हैं एवं उनका मनोबल टूटा हुआ है। जिसका असर उनकी प्रशासनिक एवं तकनीकी क्षमताओं पर पड़ रहा है जो न तो विभाग और न ही व्यक्ति विशेष के हित में है। दण्डात्मक कार्यवाहियों एवं विभिन्न जांचों के कारण अभियन्ताओं का सम्पूर्ण समय इनके जवाब बनाने, पत्रावलियां दिखाने, पूछताछ एवं बयान दर्ज कराने आदि में ही व्यतीत हो रहा है। जिससे अन्य विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं एवं इस प्रकार के अतिरिक्त विलम्ब से सम्पादित कार्यों पर अभियन्ताओं को पुनः दण्डित किया जा रहा है। कोरोना काल के लाॅकडाउन के कठिन एवं भयानक दौर में बिजली अभियंताओं द्वारा किये गये कार्यों को प्रोत्साहित करने की बजाय निगम प्रबन्धन द्वारा दण्डात्मक कार्यवाहियां की जा रही हैं।
संघ द्वारा अध्यक्ष पावर कारपोरेशन को प्रेषित पत्र में 11 सूत्रीय प्रमुख मांगों में अभियन्ताओं के विरूद्ध बड़े पैमाने पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को रोकने और अनावश्यक जांचों को समाप्त करने, एन्टी थेफ्ट थानों का दुरूपयोग रोकने, चयन वर्ष 2019-2020 में चयनित अभियन्ताओं के मनमाने ढंग से जानबूझकर व नियम विरुद्ध ढंग से रोके गये पदोन्नति आदेश जारी करने, ईआरपी प्रोजेक्ट लागू करने में की जा रही जल्दबाजी, खानापूर्ति एवं सरकारी धन की लूट रोकने, उत्पादन निगम में वर्ष 2008 में नियुक्त सहायक अभियन्ताओं सहित रिक्त पदों पर पदोन्नतियां शीघ्र किये जाने सहित अन्य मांग शामिल हैं।
पदाधिकारियों ने कहाकि यदि ऊर्जा निगमों में प्रबन्धन का मनमानापन, उत्पीड़नात्मक एवं भयादोहन, नकारात्मक, द्वेषपूर्ण व फिजूलखर्ची वाली कार्य प्रणाली समाप्त नहीं की गयी और बिजली अभियन्ताओं की समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के बिजली अभियन्ता 31 जुलाई को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत प्रदेशव्यापी असहयोगात्मक कार्यक्रम की घोषणा करने हेतु बाध्य होंगे। बिजली अभियन्ताओं ने सरकार से मांग की कि ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशान्ति एवं टकराव टालने हेतु प्रबन्धन को मितव्ययी, स्वस्थ कार्य प्रणाली अपनाने, अभियन्ताओं का उत्पीड़न रोकने और समस्याओं के सार्थक निराकरण हेतु निर्देशित किया जाये।































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