अदभुत गुफा : बेताल गुफा
परिवेश May 28, 2021 at 07:04 PM , 516किसी ज़माने में गुफा-सुरंगों का निर्माण आपाताकालीन निकासी व एकांत आवास के लिए किया जाता था. भारतीय उपमहाद्वीप में ऐसी कई गुप्त गुफाओं के होने के प्रमाण मिलते हैं, जिनका निर्माण राजा-महाराजाओं द्वारा किया गया. इन सुरंगों का इस्तेमाम युद्ध की स्थिति में राजपरिवार को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिये किया जाता था. जिसकी जानकारी पूर्णता गुप्त रखी जाती थी. इसके अलावा कुछ ऐसी भी गुफाओं के बारे में पता चलता है जो अपनी दैवीय शक्तियों का दावा करती हैं. ऐसा माना जाता है कि ये गुफाएं गुप्त सिद्धियां प्राप्त करने का स्थान हुआ करती थीं. हिमाचल प्रदेश स्थित एक ऐसी गुप्त गुफा है जिसके बारे में कहा जाता है कभी इसकी दीवारों और छत से घी टपकता था .
अपनी पहाड़ी खूबसूरती के लिए विश्व विख्यात हिमाचल प्रदेश अपने अंदर कई रहस्य छुपाए बैठा है. इस बर्फीले क्षेत्र में कई ऐसे प्राचीन स्थल मौजूद हैं जिनका संबंध प्राचीन काल से बताया जाता है. यहां प्रागैतिहासिक काल के कई मंदिरों व गुफाओ को खोजा गया है, जिनमें से कुछ हमारे सामने मात्र रहस्य के रूप में उपस्थित हैं. इन्हीं में से एक है हिमाचल की पहाड़ियों में स्थित 'बेताल गुफा'. जिसकी तिलस्मी दीवारें आज भी बनी हुईं हैं रहस्यमय
हिमाचल प्रदेश मंडी जिले के सुंदरनगर में स्थित है बेताल गुफा जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां कभी दीवारों से शुद्ध देसी घी टपकता था. इस प्राचीन गुफा से जुड़ा यह तथ्य किसी को भी सोचने पर मजबूर कर सकता है. इस अद्भुत घटना की पुष्टि खुद यहां के स्थानीय लोग करते हैं. दीवारों से टपकते देसी घी की असल सच्चाई क्या है इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता.
स्थानीय लोगों का मानना है की यह गुफा चमत्कारी शक्तियों से भरी है. जहां कभी इंसानों की हर मनोकामनाएं पूरी हुआ करती थीं. कहा जाता है जो भी गांववाला इस गुफा से बर्तन या घी मांगता था उसकी इच्छाएं जरूर पूरी हुआ करती थीं. शायद इसलिए इन दीवारों से घी टपकता रहता था.
इस चमत्कारी गुफा की लंबाई 40 से 50 मीटर और चौड़ाई 15 फीट बताई जाती है. गुफा में हिन्दू धर्म से जुड़ी कई प्रतिमाएं हैं, जिनकी पूजा यहां के स्थानीय लोग करते हैं. इस गुफा के अंदर एक जल स्रोत होने की बात भी पता चली है, जिसके बहते पानी की आवाज़ संगीत के जैसे सुनाई पड़ती है.
इस रहस्यमय गुफा को लेकर कई कहानियां जुड़ी हुई हैं. कहा जाता है जब भी कभी यहां गांव में किसी के घर शादी-ब्याह होता था, तो परिवार का कोई बड़ा सदस्य थाल सजाकर गुफा के बाहर सिंदूर से निमंत्रण लिख कर आता था. जिसके बाद वो गुफा से शादी के बर्तन मांगता था. अगली सुबह उसे गुफा के बाहर मांगे गए बर्तन मिलते थे. समारोह के खत्म होने के पश्चात व्यक्ति बर्तन वापस गुफा के पास रख देता था. जिसके बाद वो बर्तन अपने आप अदृश्य हो जाया करते थे .
लोगों की मानें तो एक बार किसी ने बर्तन लेकर गुफा को वापस नहीं किये, जिसके बाद यहां से बर्तन मिलने बन्द हो गए. लोगों का यह भी कहना है कि किसी ग्वाले की वजह से दीवारों से घी टपकना बंद हो गया. कहा जाता है कि एक दिन ग्वाला इस गुफा में आया और टपकते घी को देख उसके मन में लालच आ गया , वो रोटी के साथ घी लगाकर खाने लगा. जिसके बाद से गुफा का यह भी चमत्कार हमेशा के लिए बंद हो गया.
भले ही अब गुफा के इन चमत्कारों का कोई महत्व नहीं रहा लेकिन यहां के लोगों की आस्था अब भी बरकरार है. गांववाले यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं. इस आस्था के साथ कि यहां स्थित दैवीय शक्ति लोगों की पुकार सुनती है. इसलिए जब भी कोई गांव का सदस्य बीमार पड़ता है तो लोग गुफा के पास जाकर पूजा-पाठ करते हैं.































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