विधान परिषद में गूंजा दूषित पेयजल का मुद्दा: विजय बहादुर पाठक ने नियम 110 के तहत उठाई त्वरित कार्रवाई की मांग

जनपत की खबर , 102

लखनऊ। Vijay Bahadur Pathak ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नियम 110 के अंतर्गत राज्य में दूषित पेयजल आपूर्ति का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और शुद्ध पेयजल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, जबकि दूषित जल जानलेवा साबित हो सकता है। सभापति ने इस विषय को आवश्यक कार्रवाई हेतु सरकार को प्रेषित कर दिया है।
स्थानीय निकायों की लापरवाही पर सवाल
पाठक ने कहा कि Yogi Adityanath के नेतृत्व में राज्य सरकार घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए अभियान चला रही है, लेकिन कई स्थानों पर स्थानीय निकायों की लापरवाही के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को लगातार निर्देश दे रहे हैं कि किसी भी स्थिति में दूषित जल की आपूर्ति न हो, इसके बावजूद प्रदेश के विभिन्न शहरों से शिकायतें मिल रही हैं।
कई शहरों से शिकायतें
उन्होंने बताया कि गाजियाबाद से लेकर वाराणसी तक दूषित जल आपूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं।
आजमगढ़ के आसिफगंज मोहल्ले में नाले का गंदा पानी टोटियों से आने की शिकायत मिली।
लखनऊ में स्थिति अधिक गंभीर बताई गई, जहां नगर निगम सदन में 90 में से 63 पार्षदों ने गंदे पानी का मुद्दा उठाया।
इंदिरानगर, उदयगंज (हैवल रोड), खदरा, जानकीपुरम विस्तार और आलमबाग के आजादनगर सहित कई क्षेत्रों के नागरिक लगातार शिकायत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नाली और सीवर लाइनों के बीच से गुजर रही जर्जर पाइपलाइनों में लीकेज के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। कई स्थानों पर यह समस्या महीने में तीन-चार बार सामने आ रही है।
जांच और कार्रवाई पर भी सवाल
पाठक ने कहा कि जल गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी मुख्य रूप से जलकल और स्वास्थ्य विभाग के पास है, लेकिन कई बार जांच रिपोर्ट पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। यहां तक कि फर्जी रिपोर्ट के आधार पर मामलों को निस्तारित किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
अभियान चलाकर समाधान की मांग
उन्होंने लोक महत्व के इस आविलंबनीय विषय पर राज्यव्यापी अभियान चलाकर टूटी एवं जर्जर पाइपलाइनों को बदलने, जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की मांग की। उन्होंने कहा कि पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता यदि दूषित हो जाए तो यह जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
मामले पर अब सरकार की ओर से जवाब और आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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