लखनऊ: बड़े करदाताओं के लिए 20 फरवरी से वर्चुअल सुनवाई अनिवार्य, राज्य कर विभाग का बड़ा कदम
जनपत की खबर Feb 13, 2026 at 02:10 PM , 107लखनऊ।
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में टैक्स प्रणाली को सरल बनाने और तकनीक के अधिकतम उपयोग के माध्यम से Ease of Doing Business को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य कर विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के बड़े करदाताओं की सुविधा के लिए वर्चुअल सुनवाई (Virtual Hearing) की व्यवस्था लागू की जा रही है। यह नई प्रक्रिया 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी।
इस संबंध में प्रमुख सचिव, राज्य कर, श्रीमती कामिनी रतन चौहान ने बताया कि प्रदेश के सभी संयुक्त आयुक्त (कारपोरेट) एवं संयुक्त आयुक्त (कारपोरेट सेल-ऑयल सेक्टर) स्तर पर पंजीकृत करदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई सामान्य परिस्थितियों में अनिवार्य रूप से वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएगी। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की विभिन्न धाराओं के अनुरूप लागू होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़े करदाताओं की न्याय निर्णयन से संबंधित व्यक्तिगत सुनवाई अब वर्चुअल माध्यम से संपन्न की जाएगी, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और करदाता-हितैषी बनेगी। हालांकि, यदि किसी विशेष परिस्थिति में करदाता स्वयं अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से भौतिक रूप से उपस्थित होकर सुनवाई कराना चाहते हैं, तो उनके प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए अधिकारी द्वारा उन्हें यह अवसर भी प्रदान किया जा सकेगा।
आयुक्त, राज्य कर, उत्तर प्रदेश, डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि बड़े करदाताओं को बेहतर एवं सुगम सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य कर विभाग में कारपोरेट सर्किल का गठन किया गया है। वर्तमान में जीएसटी से संबंधित अधिकांश कार्यवाहियां ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही हैं, किंतु न्याय निर्णयन के कुछ मामलों में अब तक व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य था।
भौतिक सुनवाई के दौरान कई बार करदाता अथवा उनके अधिकृत प्रतिनिधि समय पर उपस्थित नहीं हो पाते थे, जिससे मामलों में स्थगन की स्थिति उत्पन्न होती थी। वहीं, अधिकारी के अवकाश पर होने जैसी परिस्थितियों से भी सुनवाई प्रभावित होती थी। इन कारणों से मामलों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब होता था और समय, श्रम एवं संसाधनों की अतिरिक्त खपत होती थी।
विभाग का मानना है कि वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था लागू होने से न केवल न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता और दक्षता भी सुनिश्चित होगी, जिससे करदाता और विभाग—दोनों को लाभ मिलेगा।































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