मीना मंच व पावर एंजिल्स कार्यशाला में निखरी नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और आत्मविश्वास की सीख

राष्ट्रीय , 112

लखनऊ।
वार्ड संसाधन केंद्र हजरतगंज, नगर क्षेत्र जोन-एक में मीना मंच तथा पावर एंजिल्स के सशक्तिकरण, नेतृत्व क्षमता विकास, जीवन कौशल शिक्षा और सेल्फ एस्टीम (आत्मसम्मान) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन खण्ड शिक्षा अधिकारी जोन-एक डॉ. पूनम मिश्रा तथा खण्ड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र जोन-तीन श्री प्रमेन्द्र शुक्ला के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला में नगर क्षेत्र जोन-एक एवं जोन-तीन के मीना मंच सुगमकर्ताओं को बालिकाओं के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। मास्टर ट्रेनर श्रीमती शशि प्रभा सिंह एवं श्रीमती स्वप्निल सुमन मौर्य ने प्रतिभागियों को “प्रगति के पंख”, “आधा फूल” कॉमिक बुक्स, “अरमान” मॉड्यूल, पोक्सो एक्ट तथा टूल-10 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रोचक गतिविधियों और सहभागितापूर्ण तरीकों से विस्तारपूर्वक समझाया।
प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता, नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा जीवन कौशल आधारित शिक्षा को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने के उपायों पर विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों ने समूह चर्चा, रोल प्ले, केस स्टडी और गतिविधि आधारित अभ्यासों के माध्यम से विषयों की गहन समझ विकसित की।
समापन सत्र में खण्ड शिक्षा अधिकारी जोन-एक डॉ. पूनम मिश्रा ने कहा कि मीना मंच और पावर एंजिल्स जैसे मंच केवल औपचारिक गतिविधियाँ नहीं हैं, बल्कि यह बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जागरूकता को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि “जब हमारी बालिकाएँ आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति सजग होंगी, तभी समाज सशक्त बनेगा। विद्यालयों में इन गतिविधियों का नियमित एवं प्रभावी क्रियान्वयन हमारी प्राथमिकता है।”
खण्ड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र जोन-तीन श्री प्रमेन्द्र शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन कौशल शिक्षा आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और सही-गलत की समझ भी देनी चाहिए। मीना मंच के माध्यम से हम बालिकाओं को न केवल जागरूक बना रहे हैं, बल्कि उन्हें नेतृत्व की दिशा में भी अग्रसर कर रहे हैं।”
उन्होंने सभी सुगमकर्ताओं से अपेक्षा की कि वे कार्यशाला में प्राप्त प्रशिक्षण को अपने-अपने विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करें, जिससे बालिकाओं का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला के समापन अवसर पर नगर क्षेत्र जोन-एक एवं जोन-तीन के शिक्षकगण उपस्थित रहे। आयोजन की व्यवस्थाओं में विनोद शर्मा, रूबल मिश्रा, सोनी, उत्कर्ष पाण्डेय, इन्दु प्रकाश एवं राजू ने व्यवस्था सहायक के रूप में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
दो दिवसीय यह कार्यशाला शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी सिद्ध हुई, जिससे विद्यालयों में बालिका सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त पहल को नई गति मिली।

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