डी-रेगुलेशन 1.0 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, 23 प्रमुख सुधारों के पूर्ण क्रियान्वयन में बना अग्रणी

जनपत की खबर , 117

लखनऊ।
देशभर में व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों के लिए 23 प्रमुख प्राथमिक सुधार क्षेत्रों को चिह्नित किया गया था। इन सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
केंद्र सरकार के डी-रेगुलेशन 1.0 कार्यक्रम के अंतर्गत जारी राज्य-वार रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को पहला स्थान मिला है। यह मूल्यांकन भूमि, भवन एवं निर्माण, श्रम, यूटिलिटीज, अनुमतियों सहित पांच प्रमुख क्षेत्रों में विस्तारित 23 प्राथमिक सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन के आधार पर किया गया, जिसमें समग्र सुधार प्राथमिकताओं को भी सम्मिलित किया गया था।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने सभी 23 प्राथमिक सुधार क्षेत्रों को पूर्णतः और प्रभावी रूप से लागू किया है। यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा नीतिगत सरलीकरण, विनियामक युक्तिकरण तथा निवेशकों और उद्यमियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुदृढ़ करने की दिशा में किए गए निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।
भूमि सुधारों के अंतर्गत राज्य में मिश्रित उपयोग विकास को प्रोत्साहित करने के लिए फ्लेक्सिबल जोनिंग फ्रेमवर्क को अपनाया गया है। भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल एवं पूरी तरह डिजिटल किया गया है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न औद्योगिक श्रेणियों के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई मानकों का युक्तिकरण किया गया है। निवेशकों को पारदर्शी और सुलभ जानकारी उपलब्ध कराने के लिए उपलब्ध औद्योगिक भूमि का जीआईएस आधारित लैंड बैंक विकसित कर उसे इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) से एकीकृत किया गया है।
भवन एवं निर्माण क्षेत्र में औद्योगिक और वाणिज्यिक भूखंडों में भूमि की हानि को कम करने हेतु भवन उपविधियों में संशोधन किए गए हैं। भवन मानचित्र स्वीकृति, संयुक्त निरीक्षण, अग्निशमन निरीक्षण, अधिभोग एवं पूर्णता प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन निर्गमन में सूचीबद्ध तृतीय पक्ष संस्थाओं की भूमिका को मजबूत किया गया है, जिससे अनुमोदन प्रक्रियाओं की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आई है।
श्रम सुधारों के अंतर्गत कुछ ‘जोखिमपूर्ण’ उद्योगों में महिलाओं के कार्य पर लगे प्रतिबंधों को हटाया गया है। कारखानों, दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में महिलाओं को रात्रिकालीन रोजगार की अनुमति दी गई है तथा कार्य समय से संबंधित प्रावधानों का युक्तिकरण किया गया है। इसके अलावा, दुकान एवं स्थापना अधिनियम के तहत अनुपालन के लिए श्रमिकों की सीमा को बढ़ाकर 20 या उससे अधिक कर दिया गया है।
इसके साथ ही पर्यावरणीय स्वीकृतियों के लिए तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की गई है। कारखाना लाइसेंस और व्यापार लाइसेंस की स्वीकृति प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया गया है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्युत और जल कनेक्शनों को त्वरित किया गया है तथा गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को श्वेत श्रेणी के अंतर्गत पुनर्वर्गीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्राविधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 को लागू किया गया है और सभी राज्य स्तरीय सेवाओं को राज्य सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली (NSWS) से जोड़ा गया है, जिससे सुधारों की पारिस्थितिकी और अधिक मजबूत हुई है।
ये समस्त सुधार उत्तर प्रदेश को देश के सबसे प्रगतिशील और निवेश-अनुकूल राज्यों में स्थापित करते हैं तथा एक सुदृढ़, पारदर्शी और विकासोन्मुख व्यापारिक वातावरण के निर्माण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

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