कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर सीएम योगी का नमन, बोले— सत्ता नहीं, संकल्प और सिद्धांत थे बाबूजी की पहचान
जनपत की खबर Jan 05, 2026 at 04:05 PM , 132लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं ‘पद्म विभूषण’ स्वर्गीय कल्याण सिंह की 94वीं जयंती के अवसर पर 2, माल एवेन्यू स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबूजी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता को नहीं, बल्कि संकल्प और सिद्धांत को चुना और यही उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1991 में जब बाबूजी कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने, तब प्रदेश अव्यवस्था, अराजकता और अपराध की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था। आतंकी गतिविधियां बढ़ रही थीं और शासन की योजनाओं का लाभ गांव, गरीब, किसान, महिलाओं और युवाओं तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा था। प्रशासनिक तंत्र कमजोर था और कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगा चुका था।
सीएम योगी ने कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में बाबूजी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, जिससे प्रदेश में सुशासन की दिशा में आगे बढ़ने का विश्वास जगा। प्रदेशवासियों के मन में यह धारणा बनी कि उत्तर प्रदेश अब दृढ़ संकल्प के साथ विकास के नए मार्ग पर अग्रसर होगा, हालांकि इस दौरान उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए अनेक राजनीतिक षड्यंत्र भी रचे गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबूजी का कार्यकाल श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के निर्णायक दौर से जुड़ा रहा। उन्होंने रामभक्तों और संत समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी अटूट आस्था को सर्वोपरि रखा। सत्ता की चिंता किए बिना उन्होंने अपने कर्तव्य और सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय लिए और आवश्यकता पड़ने पर सत्ता त्यागने से भी पीछे नहीं हटे।
सीएम योगी ने कहा कि बाबूजी की सरकार भले ही चली गई हो, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं स्वीकार की और साहसपूर्वक अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उनका शासनकाल सुशासन, विकास और राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने वाला एक ऐतिहासिक अध्याय बन गया, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से राष्ट्रवाद की प्रेरणा प्राप्त की और उसे अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। वे जीवनपर्यंत उसी विचारधारा के अनुरूप कार्य करते रहे और उत्तर प्रदेश की राजनीति को स्पष्ट दिशा देने का कार्य किया।































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