*बेसिक शिक्षा में 'पुरस्कार संस्कृति' पर सवाल, मानकविहीन निर्माण के आरोपों के बीच अफसरों के सम्मान पर उठे सवाल*

लखीमपुर खीरी , 7

(हरिशंकर मिश्र)

*लखीमपुर खीरी/बहराइच।* बेसिक शिक्षा विभाग में अच्छे कार्यों के बजाय चहेतों को सम्मान मिलने के आरोप लग रहे हैं। शिक्षक संगठनों और ग्रामीणों का कहना है कि जिन अफसरों के कार्यकाल में स्कूलों की स्थिति नहीं सुधरी, उन्हें भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कर दिया जाता है।

*क्या है मामला:*  
आरोप है कि वर्ष 2015 में तत्कालीन बीएसए लखीमपुर खीरी ने ब्लॉक बिजुआ के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी अनुराग मिश्रा का नाम भारत सरकार के सम्मान के लिए भेजा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अनियमित थी और कई अतिरिक्त कक्षा-कक्ष मानक के विपरीत बनाए गए। शिक्षा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ। 

जब इस सम्मान के आधार के बारे में बीएसए कार्यालय से जानकारी मांगी गई तो बताया गया कि इसका जवाब भारत सरकार से मांगा जाए।

*बहराइच में भी मिला सम्मान:*  
स्थानांतरण के बाद अनुराग मिश्रा की तैनाती जनपद बहराइच में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर हुई। आरोप है कि वहां भी कायाकल्प योजना के तहत रंगाई-पुताई और अन्य कार्यों में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। इसके बावजूद 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय पर्व पर जिलाधिकारी बहराइच अक्षय त्रिपाठी द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।

*पत्नी की नौकरी पर भी आरोप:*  
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी भी लखीमपुर खीरी में शिक्षक पद पर तैनात हैं। आरोप है कि वह महीने में एक या दो दिन ही विद्यालय जाती हैं, लेकिन पूरा वेतन लेती हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

*शिक्षकों में नाराजगी:*  
ईमानदार शिक्षकों और अफसरों का कहना है कि जब गलत कार्यों के बावजूद सम्मान मिलेगा तो सही काम करने वालों का मनोबल टूटता है। एक वरिष्ठ शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पुरस्कार का आधार पारदर्शी होना चाहिए। जमीनी हकीकत, बच्चों का लर्निंग आउटकम और स्कूल की ग्रेडिंग देखकर सम्मान तय हो।

*क्या है मांग:*  
1. भारत सरकार और राज्य सरकार सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक करे।
2. जिन अफसरों के कार्यकाल में शिकायतें हैं, उनके सम्मान की समीक्षा हो।
3. शिकायत वाले ब्लॉकों में शिक्षा की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराई जाए।
4. बायोमीट्रिक हाजिरी से शिक्षकों और अफसरों की उपस्थिति सुनिश्चित हो।

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