*आचार्य दक्षता वर्ग का सफल आयोजन, शिक्षण गुणवत्ता संवर्धन पर रहा विशेष जोर*

लखीमपुर खीरी , 46

लखीमपुर खीरी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (सीबीएसई बोर्ड) में विद्या भारती की योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह के अंतिम दिवस आयोजित होने वाले आचार्य दक्षता वर्ग का आयोजन बड़े ही व्यवस्थित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष शैलेश कुमार गुप्ता, सदस्य अजय अग्रवाल एवं प्रधानाचार्य श्रवण कुमार अवस्थी द्वारा मां सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्यों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक विकास को सुदृढ़ करना रहा।
*सत्रवार विस्तृत विवरण*

*प्रथम सत्र – ‘विद्या भारती का परिचय’*
इस सत्र का संचालन *आचार्य विकास मिश्रा* द्वारा किया गया। उन्होंने विद्या भारती की स्थापना, उद्देश्य, कार्यपद्धति एवं राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त एवं राष्ट्रभक्त नागरिकों के निर्माण का सशक्त अभियान है।

*द्वितीय सत्र – ‘हमारा लक्ष्य (व्याख्या सहित)’*

*उप प्रधानाचार्य संजय द्विवेदी* द्वारा लिए गए इस सत्र में संस्था के मूल उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की विस्तृत व्याख्या की गई। उन्होंने शिक्षकों को यह समझाया कि शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य केवल परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास है—जिसमें चरित्र निर्माण, नैतिकता, अनुशासन और राष्ट्रभाव प्रमुख हैं।

*तृतीय सत्र – ‘प्रातः स्मरण वाचन एवं भावार्थ’*

*आचार्या बहन अर्चना* ने इस सत्र में प्रातः स्मरण के श्लोकों का उच्चारण, उनका सही तरीका एवं उनके भावार्थ को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि प्रातः स्मरण विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है।

*चतुर्थ सत्र – ‘एकात्मा स्त्रोत (10 श्लोक भावार्थ सहित)’*

*आचार्य श्रीधर मौर्य* द्वारा इस सत्र में एकात्मा स्त्रोत के 10 प्रमुख श्लोकों का अर्थ एवं उनके गूढ़ संदेश को सरल भाषा में समझाया गया। उन्होंने बताया कि यह स्त्रोत भारतीय संस्कृति की एकता, अखंडता एवं समरसता का प्रतीक है।

*पंचम सत्र – ‘विषयशः प्रशिक्षण’*

यह सत्र *आचार्य ओम प्रकाश एवं आचार्य अभिषेक* द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया। इसमें विषयवार शिक्षण पद्धति, कक्षा प्रबंधन, नवीन शिक्षण तकनीकों एवं विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार पढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों को व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए।

*छठा सत्र – ‘योगाभ्यास, प्राणायाम एवं व्यायाम’*

*आचार्य अविनाश दीक्षित* ने इस सत्र में योग, प्राणायाम एवं शारीरिक व्यायाम के महत्व को बताते हुए विभिन्न अभ्यासों का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य दोनों सुदृढ़ होते हैं, जो एक शिक्षक के लिए अत्यंत आवश्यक है।

*प्रधानाचार्य का उद्बोधन*
कार्यक्रम के अंत में *प्रधानाचार्य श्रवण कुमार अवस्थी* ने आचार्य दक्षता वर्ग की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण वर्ग शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनकी शिक्षण क्षमता को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज का निर्माता होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन हो रहे हैं, ऐसे में शिक्षकों को भी स्वयं को अद्यतन रखना अत्यंत आवश्यक है। आचार्य दक्षता वर्ग जैसे आयोजन शिक्षकों को नई ऊर्जा, नवीन विचार एवं बेहतर शिक्षण तकनीकों से परिचित कराते हैं।
प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि विद्यालय की प्रगति तभी संभव है जब प्रत्येक आचार्य अपने कर्तव्यों के प्रति सजग, अनुशासित एवं समर्पित रहे। उन्होंने सभी शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के जीवन में आदर्श स्थापित करें और उन्हें संस्कारयुक्त, राष्ट्रनिष्ठ एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास करें।

*समापन सत्र संघ प्रार्थना के साथ हुआ*

कार्यक्रम का समापन *आचार्य सर्वेश तिवारी एवं विवेक अवस्थी* द्वारा संघ प्रार्थना के साथ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

*आभार प्रदर्शन*
अंत में प्रधानाचार्य श्रवण कुमार अवस्थी ने सभी आचार्यों के सक्रिय सहभाग एवं सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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