*ग्रामीण बेटियों ने तीन माह की कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर बढ़ी आत्मनिर्भरता की ओर*
लखीमपुर खीरी Apr 19, 2026 at 05:37 PM , 26तीन महीने की निष्ठा और लगन से पूरी की गई कंप्यूटर प्रशिक्षण ने ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के जीवन में नया आत्मविश्वास भर दिया। दूर-दराज के गांवों से आयी उन बेटियों ने कंप्यूटर सीखा, जिन्हें पहले इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अब वही बेटियां शानदार परिणाम के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं। त्रैमासिक प्रशिक्षण के उपरान्त परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। 220 छात्राओं में से 3 छात्राओं ने अपनी मेहनत से 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि आधे से अधिक बेटियां 80-90 प्रतिशत अंक हासिल करने में सफल रहीं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिश्रम का प्रमाण है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में हो रहे सकारात्मक बदलाव को भी दर्शाती है। एम ट्रस्ट द्वारा संचालित डिजिटल लर्निंग सेन्टर रतहरा तथा लखीमपुर के लीला कुआं में प्रमाण पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बेटियों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
लखीमपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य सुमन वर्मा और जिला पंचायत इंटर कॉलेज की शिक्षिका रेखा वर्मा उपस्थित रहीं। साथ ही रतहरा क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ब्लॉक नोडल बालिका शिक्षा सलीम अहमद उपस्थित रहे। संस्था निदेशक संजय कुमार व कार्यकारी निदेशक प्रीति उपाध्याय माया सिंह वार्डेन कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मितौली, प्रो0 संजय कुमार वाईडीपीजी कालेज ने बेटियों को प्रमाण पत्र वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। यह तीन महीने का कंप्यूटर कोर्स सीआईआई फाउंडेशन, एम ट्रस्ट, ब्रेन कोड, ऑडिस और इन्फोसिस के सहयोग से संचालित किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बेटियों को डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ जॉब के लिए तैयार करना था, ताकि वे भविष्य में नये अवसरो को प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्य अतिथि सलीम अहमद ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में बालिकाओं को शिक्षा को लेकर बहुत ही महत्वपूर्ण है मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है कि एम ट्रस्ट 25 वर्षो से लगातार बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा व पोषण पर कार्य कर रही एम ट्रस्ट की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए एक नई दिशा साबित हो रही है, जहां शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता का सपना भी साकार हो रहा है। जब बालिकाएं शिक्षित होती हैं, तो वे समाज की प्रगति में योगदान देती हैं। एक शिक्षित महिला स्वस्थ परिवारों का पालन-पोषण करेगी, आर्थिक विकास में योगदान देगी और गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ेगी। आइए हम सभी अभिभावकों और समुदायों को प्रत्येक बालिका की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करें। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक कदम है। मुझे उम्मीद है कि जिन लड़कियों को परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, वे मजबूत और आत्मविश्वासी बनेंगी और खुद पर भरोसा रखेंगी। जब आप अपनी शिक्षा जारी रखती हैं तो सब कुछ संभव है। कार्यक्रम में सोनम , रामचन्द्र , नाज, इदरीश, ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक व बालिकाओं ने प्रतिभाग किया ।































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