पत्रकारहित में वरिष्ठ पत्रकार की कुर्बानी, और मान्यता समिति का चुनाव
जनपत की खबर Dec 23, 2022 at 02:50 PM , 996लखनऊ।
मान्यता समिति का चुनाव आ गया था। पत्रकारों के नेतागण पत्रकारहित के लिये जान देने को तैयार होने लगे थे। तैयारी इस कदर थी कि अगर किसी वोटर पत्रकार का साइकिल भी पुलिस वाले रोक लेते तो नेतागण उसकी ईंट से ईंट बजा सकते थे। कुछ नहीं बजता तो साइकिल की घंटी ही बजा सकते थे। और साइकिल की घंटी खराब होती तो मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगकर उनसे अपने दो काम कराने की बात कर सकते थे। मुख्यमंत्री का समय नहीं मिलता तो डिप्टी सीएम का समय तो बिल्कुल ले सकते थे। मतलब यह कि पत्रकारहित के लिये नेतागण कुछ भी कर सकते थे। कुछ भी मतलब, कुछ भी।
बेंजामिन टैंकची, पीटर तोपती, राबर्ट राइफल, माइकल कट्टा, हडसन चक्कू जैसे मौसमी पत्रकार नेताओं के लिये पत्रकारहित सबसे ऊपर हो चुका था। समस्त पत्रकार नेता बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात आदि प्रदेशों का दौरा कम कर दिया था। पत्रकारहित में वह अपने ही प्रेदश में ज्यादा से ज्यादा समय गुजारने में जुट गये थे। हालात ऐसे हो गये कि वरिष्ठ युवा पत्रकार से एक भिखारी ने पैसे मांग लिये, इस बात की जानकारी जब माइकल कट्टा को हुई तो वह अपना बंगाल दौरा बीच में ही छोड़कर वापस लौटे और भिखारी के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिये मीटिंग बुला ली। रणनीति तैयार की जाने लगी।
वह तो भला हो मार्केटिंग गुरू का कि उन्होंने समझाया कि भिखारी के खिलाफ आंदोलन करने से कोई फायदा नहीं है, आंदोलन तो अधिकारी के खिलाफ होना चाहिए ताकि पत्रकारहित की बात हो सके। काम लायक अधिकारी मिलने तक माइकल कट्टा समूह ने आंदोलन को टाल दिया। इस बात से नाराज कट्टा समूह के युवा पत्रकार साइमन फेंकू, जिन्हें लिखने-पढ़ने से बुरी तरह परहेज था, ने अपने सौतेले जीजा को फोन लगाकर हड़काना शुरू किया, ''प्रमुख सचिव जी, आप यह मत समझिये कि हम चुप बैठेंगे। हम सब कुछ बर्दाश्त कर लेंगे, लेकिन पत्रकारों की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं करेंगे। आंदोलन तो आज नहीं कल होकर ही रहेगा। पत्रकारों का हित माइकल कट्टा भइया के लिये सबसे ऊपर है।''
साइमन का सौतेला जीजा समझ ही नहीं पाया कि उसका मौसेरा साला उसके जैसे ई-रिक्शा चालक को प्रमुख सचिव कह कर काहें हड़का रहा है। फोन कटते ही मार्केटिंग गुरू ने कहा, ''साइमन के प्रमुख सचिव से घरेलू संबंध हैं। इनके फुफेरे मौसा के ममेरे जीजा के चचेरे साले प्रमुख सचिव के सौतेले फूफा लगते हैं। इसके बावजूद साइमन ने पत्रकारहित में कोई समझौता नहीं किया। रिश्तेदारी तक को खतरे में डाल दिया। ऐसे युवा पत्रकारों पर हमें गर्व होना चाहिए।'' मार्केटिंग गुरू का भाषण सुन साइमन फेंकू की आंखों में आंसू आ गये। वह झट से उठे और वहां मौजूद सभी पत्रकारों के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। माहौल करूणा से भर गया।
तय हुआ कि साइमन के बलिदान को केक काटकर मनाया जायेगा। प्रेस रूम के बैंक्वेट हाल में केक कटा सबमें बंटा। केक कटने की खबर जब पत्रकार नेता राबर्ट राइफल समूह को लगी तो उन्होंने तय किया कि वह भी प्रेस रूम के बैंक्वेट हॉल में केक काटेंगे। इसके लिये राबर्ट के लोगों ने एक वरिष्ठ पत्रकार, जिनका जन्मदिन सात महीने बाद अक्टूबर में था, उसने निवेदन किया कि पत्रकारहित में वह अपना जन्मदिन खिसकाकर जनवरी में किसी दिन रख लें। केक काटना है। राबर्ट राइफल के निवेदन पर वरिष्ठ पत्रकार ने पत्रकारहित में अपना जन्मदिन जनवरी में रखने को तैयार हो गये।
इस खुशी के मौके पर राबर्ट ने भाषण दिया, ''ये सरकार निकम्मी है, और जो सरकार निकम्मी है, उसे हम अपने अखबार के पाठक के साथ मिलकर बदलेंगे। ट्रांसफर-पोस्टिंग करवाने का पत्रकारों का हक छीनने वाली सरकार को रहने का कोई हक नहीं है। आज पत्रकारहित की बात कोई नहीं करता। हमारे वरिष्ठ पत्रकार ने पत्रकारहित में अपने जन्मदिन की जो कुर्बानी दी है, उसे सदियों तक आने वाली युवा पीढ़ी याद रखेगी।'' युवा पत्रकार चमन चिंटू उठे और वहां मौजूद सभी का पैर छूकर प्रणाम किया, जोश में उन्होंने प्रेस रूम के सामने से जा रहे दो चपरासी और तीन कलर्क के पांव भी छू लिये। वह पीटर्सन दुबे का पांव छूने को उद्वेलित हो गये, लेकिन मार्शलों ने उन्हें रोक लिया तो वो मार्शलों का पैर छूकर ही वापस प्रेस रूम लौट आये।
राबर्ट राइफल और चमन चिंटू के प्रेम से अभिभूत वरिष्ठ पत्रकार ने भाषण दिया, ''युवा पत्रकारों को आगे बढ़ाने के लिये अगर मेरी कुर्बानी की जरूरत पड़ेगी तो मैं अपने कई जन्मदिन कुर्बान करने से पीछे नहीं हटूंगा। अगर राबर्ट और चमन जैसी युवा पीढ़ी मार्च, अप्रैल, मई या जून में भी मेरा जन्मदिन मनाना चाहेगी तो यह कुर्बानी देने के लिये मैं सदैव तैयार रहूंगा। जन्मदिन क्या मैं तो युवा पत्रकारों के लिये मरणदिन भी मनाने को तैयार हूं। पर एक बात का ध्यान रखना है कि अगली बार केक बिना अंडा वाला और चॉकलेट फ्लेवर वाला आना चाहिए। पाइनेपल वाला ठीक नहीं होता है।'' इस भाषण के बाद जोरदार तालियां बजी, पूरा बैंक्वेट हॉल गूंज उठा। चमन चिंटू फिर उठे सभी का पैर छुये, प्रेस रूम के बाहर तीन विधायक, चार चपरासी, पांच क्लर्क का पैर छूने के बाद मार्शलों का पैर छूकर वापस लौट आये।
अनील कुमार वरिष्ठ पत्रकार की वॉल से































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