आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के एकीकरण हेतु प्रशिक्षण माॅड्यूल का विकास

जनपत की खबर , 249

स्वयं सहायता समूहों व विशेष स्वयं सेवी संगठनों का समुदाय आधारित नालेज-नेटवर्क तैयार किया जायेगा

जलवायु परिवर्तन मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है- एल.वेंकटेश्वर लू

जलवायु परिवर्तन के कारकों और परिणामों पर गम्भीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक कदम उठाये जायें

दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान एवं जर्मन डेवेलपमेन्ट को-आॅपरेशन के संयुक्त तत्वाधन में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

उत्तर प्रदेश के दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान के महानिदेशक एल.वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान एवं जर्मन डेवेलपमेन्ट को-आॅपरेशन के संयुक्त तत्वाधान में आज 09 सितम्बर, 2021 को संस्थान के मंथन प्रेक्षागृह में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए श्री एल.वेंकटेश्वर लू ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डी.आर.आर.) और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (सीसीए) के एकीकरण और प्रशिक्षण माॅड्यूल के विकास, संस्थान के आपदा प्रबंधन केन्द्र में जलवायु परिवर्तन एवं अनुकूलन हेतु अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने में सहायता करना है।
महानिदेशक, एल.वेंकटेश्वर लू ने कहा कि जर्मन डेवलेपमेन्ट को-आॅपरेशन द्वारा प्रायोजित एवं सीमैप के तकनीकी सहयोग से स्थानीय बाजार की मांग के आधार पर औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन तकनीक एवं प्रोसेसिंग के प्रदर्शन, क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान, झाँसी के कृषि प्रक्षेत्र पर एक एकड़ क्षेत्र में प्रशिक्षणार्थियों के लिये प्रदर्शन प्रक्षेत्र का विकास होगा और प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित स्वयं सहायता समूहों व विशेष स्वयं सेवी संगठनों का समुदाय आधारित नालेज-नेटवर्क तैयार किया जायेगा।
जलवायु परिवर्तन के सम्बन्ध में श्री लू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारक है। जलवायु परिवर्तन से ग्लोबल वार्मिंग द्वारा ग्लेसियर के पिघलने एवं समुद्र तल के ऊपर उठने का खतरा उत्पन्न होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, समाज में विभिन्न समस्याएं जैसे पानी, कृषि उत्पादन तथा खाद्य सुरक्षा में कमी के फलस्वरूप विकासशील देशों में बच्चों में कुपोषण, गम्भीर बीमारियों और गरीबी बढ़ने का कारण बनता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन द्वारा कृषि उत्पादकता एवं प्राकृतिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव निरंतर पड़ रहा है। इसके लिए आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन के कारकों और परिणामों पर गम्भीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक कदम उठाये जायें, ताकि हम सब अपनी पृथ्वी को सुरक्षित व संरक्षित रख सकंे। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला से निश्चित ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे और हम सभी अपने छोटे-छोटे प्रयासों से जलवायु परिवर्तन के गम्भीर दुष्प्रभावों को रोक सकेंगे।
निदेशक, जलवायु परिवर्तन सर्कुलर इकोनाॅमी, आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं अनुकूलन हेतु महिलाओं के भागीदारी से क्षमता संवर्द्धन के लिये एस0आई0आर0डी0 के साथ एक बड़ी साझेदारी की शुरूआत हो रही है। जर्मन डेवेलपमेन्ट को-आॅपरेशन जर्मन सरकार की एक सरकारी संस्था है, जो 120 देशों में कार्य कर रही है। भारत के सबसे बड़े राज्य उ0प्र0 के लिये प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन समसामयिक दृष्टि से एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसके निस्तारण हेतु उत्तर प्रदेश सरकार के साथ यह साझेदारी का बहुत बड़ा कार्य दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान द्वारा किया जायेगा।
कार्यशाला में पर्यावरण निदेशालय पी0पी0टी0, पंकज आर्या के माध्यम से उ0प्र0 में निदेशालय द्वारा किये जाने वाले कामों के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में उ0प्र0 जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण की स्थापना हुई, जिसके द्वारा सभी विभागों के समन्वय व सहयोग के माध्यम से जलवायु परिवर्तन एवं अनुकूलन हेतु कार्यों को विभिन्न विधाओं के माध्यम से समुदाय व समाज के हित में किया जा रहा है। मिशन 2020 तक की योजना बनायी गयी जिसके द्वारा कई अन्र्तराष्ट्रीय कार्यक्रमों की प्रगति के अनुकूल परिवर्तन किया जाता रहा है, एस0डी0जी0 के साक्ष्य को भी शामिल किया जाता है।
कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन पर सम्बन्धित हितधारकों की क्षमता संर्वद्धन हेतु विभिन्न विभागों यथा-पर्यावरण, पंचायती राज, कृषि, वन, उद्यान, नाबार्ड, सीमैप, राज्य आयुष सोसाइटी, राज्य आजीविका मिशन, राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण, मनरेगा, राज्य कृषि प्रशिक्षण प्रबन्ध संस्थान, राज्य वन प्रशिक्षण संस्थान, यू0पी0 नेडा, पशुपालन, यूनीसेफ, गोरखपुर इनवायरमेन्ट एक्शन गु्रप, राजस्व विभाग, क्षेत्रीय/जिला ग्राम्य विकास संस्थान आदि संस्थानों के प्रमुखों/अधिकारियों/ प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
इस कार्यशाला में राज्य आपदा प्रबन्ध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले0जे0 आर0पी0 शाही, मुख्य अतिथि तथा ग्राम्य विकास आयुक्त, श्री अवधेश कुमार तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इनके अलावा इन विभागों के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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