लॉजिस्टिक हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 500 करोड़ और मिले

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ग्रेटर नोएडा ।
ग्रेटर नोएडा में विकिसत होने वाले लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपये और दे दिए हैं। इन परियोजनाओं की डीपीआर बन चुकी हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के लिए सलाहकार कंपनी की तलाश की जा रही है। दोनों हब विकिसत करने में करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से कुछ काम सरकार कराएगी और कुछ काम पीपीपी मॉडल पर होंगे।

दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल रेल कॉरिडोर (डीएमआईसी) परियोजना के तहत लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जाएंगे। डीएमआईसी का नाम बदलकर अब नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी) कर दिया गया है। इस पूरी परियोजना के तहत यहां पर करीब 800 एकड़ में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप बसाई जा रही है। यह काम इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (आईआईटीजीएनएल) कंपनी कर रही है। एनआईसीडीसी और आईआईटीजीएनएल मिलकर लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित करेंगे। दोनों कंपनियों की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रहेगी। लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की डीपीआर पहले बन चुकी है।

आईआईटीजीएनएल के एमडी नरेंद्र भूषण ने बताया कि लॉजिस्टिक और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 500 करोड़ रुपये और मिल गए हैं। इससे पहले 350 करोड़ रुपये मिले थे। अब तक इन परियोजनाओं के लिए 227 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। कोरोना महामारी के चलते परियोजना में थोड़ा विलंब हुआ है। बोड़ाकी के पास बनने वाले लॉजिस्टिक हब में सामान उतारने और चढ़ाने के लिए इंतजाम किए जाएंगे। रेल नेटवर्क बनाया जाएगा। इसके लिए यार्ड बनेगा। जिसमें 16 रेल लाइन बनाकर मुख्य लाइन से जोड़ा जाएगा। ताकि यार्ड तक ट्रेन पहुंच सकें। यह काम कंपनी खुद करेगी। बाकी काम पीपीपी मॉडल पर होगा। कोल्ड चेन और पैकेजिंग का काम करने के लिए प्लटेफार्म बनाए जाएंगे। वेयरहाउस भी बनाए जाएंगे ताकि सामान को स्टोर किया जा सके।

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