ईस्टर्न पेरिफेरल और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने में होगी देरी नोयडा।

अन्य खबरे , 1517

नोयडा।
मुआवजे की मांग के चलते एक बार फिर ईस्टर्न पेरिफेरल (Eastern Peripheral Expressway) और यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) को लिंक करने के प्रोजेक्ट का कार्य अधर में लटक गया है। दरअसल राज्य सरकार ने वेस्ट यूपी के इन दो प्रमुख एक्सप्रेसवे (Expressway) को जोड़ने का फैसला लिया था। इनके जुड़ने से हरियाणा और पश्चिमी यूपी के कई जिलों को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) से जोड़ना बेहद आसान हो जाता। 

इस इंटरचेंज से समय और ईंधन दोनों की बचत होती। लेकिन जमीन दे चुके किसानों क अतिरिक्त मुआवजे की मांग के चलते अब यह महत्वपूर्ण परियोजना बीच में रूक गई है। भूमि दे चुके किसानों ने 64.7 फ़ीसदी अतिरिक्त मुआवजे की मांग की है। हालांकि इस पर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मामला विचाराधीन है। लेकिन किसानों के सख्त रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि इंटरचेंज निर्माण के कार्य में काफी विलंब हो सकता है। 

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के 1 शासनादेश को रद्द किया था, जिसके तहत यमुना प्राधिकरण (Yamuna Expressway Authority) प्रभावित किसानों को 64.7 फ़ीसदी मुआवजे की रकम दे रहा है। जेपी समूह को जमीन दे चुके प्रभावित किसानों को अब तक अतिरिक्त मुआवजा राशि नहीं मिली है। यमुना प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर अब तक सुनवाई नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने तक अब प्राधिकरण किसानों को अतिरिक्त मुआवजे की राशि नहीं दे सकता है। इसलिए इस अहम प्रोजेक्ट के लंबा खींचने के पूरे आसार हैं। 

दरअसल नोएडा एयरपोर्ट (Greenfield Noida International Airport) के चलते ईस्टर्न पेरिफेरल और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने की योजना बनी थी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, जगनपुर अफजलपुर गांव के पास 0 पॉइंट से करीब 10 किलोमीटर पर यमुना एक्सप्रेस वे के ऊपर से गुजरा है। इस एक्सप्रेस वे से हरियाणा और वेस्ट यूपी के बीच आवागमन आसान है। एक्सप्रेसवे लिंक करने से मुसाफिरों को जेवर एयरपोर्ट जाने में भी सुविधा मिलेगी। 

*2 साल पहले चुनी गई कंपनी*

इसके लिए करीब 2 साल पहले निर्माण एजेंसी का चयन किया गया था। एक्सप्रेसवे लिंक के निर्माण के लिए दिल्ली की देव एस कंपनी को अगस्त 2019 में जिम्मेदारी दी गई थी। अगले 18 महीने में निर्माण कार्य पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया था। इस इंटरचेंज में 4 क्लोवर लीफ और 8 रैंप बनाने का प्रस्ताव है। इन पर 75 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इंटरचेंज को बनाने में 54 हेक्टेयर भूमि लगेगी। 

लेकिन दोनों एक्सप्रेसवे के लिंक हो जाने से आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी। फिलहाल ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर आने जाने के लिए वाहनों को ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव के निकट उतरना होता है। ग्रेटर नोएडा होते हुए वाहन यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट पहुंचते हैं। इसके लिए गाड़ियों को 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसमें ज्यादा समय और ईंधन दोनों की खपत होती है। 
किसानों का कहना है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के प्रभावित कृषकों को 3500 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा मिला है। इसलिए इंटरचेंज में जमीन देने वाले किसानों को भी इसी दर पर मुआवजा मिलना चाहिए। पर इसको लेकर खींचातानी जारी है। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

Related Articles

Comments

Back to Top