अवनीश अवस्थी को हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस

जनपत की खबर , 568

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी को प्रयागराज हाईकोर्ट ने नोटिस भेजा है। हाईकोर्ट ने अवनीश कुमार अवस्थी से पूछा है कि उन्होंने अदालत की अवमानना क्यों की? इसके लिए क्यों न उन्हें दंडित किया जाए? हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह को 15 जुलाई के दिन सुनवाई के वक्त खुद या अपने वकील के माध्यम से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

फॉरेंसिक साइंस डिपार्टमेंट में कार्यरत साइंटिफिक असिस्टेंट संजय कुमार पांडे की याचिका पर प्रयागराज हाईकोर्ट में मनीष कुमार अवस्थी को यह नोटिस भेजा है। संजय कुमार पांडे ने इसी साल फरवरी महीने में एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 1998 में वह गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले फॉरेंसिक साइंस डिपार्टमेंट में भर्ती हुए थे। वर्ष 2005 में उन्हें सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति दे दी गई थी, लेकिन उनकी इंटीग्रिटी पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2016 में सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश पर वह बहाल हो गए थे, लेकिन उनकी पदोन्नति को लेकर विवाद बना रहा। 

संजय पांडे ने इसी साल फरवरी में याचिका दाखिल करके अदालत को बताया कि उनकी पदोन्नति को लेकर विभागीय पदोन्नति समिति का फैसला बंद लिफाफे में है। जिस पर अब तक महकमे ने कोई संज्ञान नहीं लिया है। अदालत ने 23 मार्च 2021 को संजय कुमार पांडे की याचिका पर एकबार फिर फैसला सुनाया। न्यायालय ने अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी को आदेश दिया कि अदालत का फैसला मिलने के बाद 6 सप्ताह में वह संजय कुमार पांडे के आवेदन पर स्पष्ट निर्णय लेंगे। अब एक बार फिर संजय कुमार पांडे ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और बताया कि 23 मार्च 2021 के आदेश पर अपर मुख्य सचिव (गृह) ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। इसे अदालत ने अवमानना माना और अवनीश कुमार अवस्थी को नोटिस जारी किया है। 

अदालत ने अपर मुख्य सचिव (गृह) से पूछा है कि उन्होंने जानबूझकर अदालत की अवमानना की है। लिहाजा, उन्हें दंडित क्यों नहीं किया जाए। अब इस मामले की सुनवाई 14 जुलाई को होगी। उस दिन अपर मुख्य सचिव स्वयं या अपने वकील के माध्यम से पक्ष रखेंगे।

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