पड़ोसी प्रथमः भारत के सहयोग से भूटान में 2 प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास

जनपत की खबर , 21

थिम्पू। भारत के सहयोग से भूटान के गेदू कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज (जीसीबीएस) में 15 अप्रैल को एक नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास किया गया। यह परियोजना भारत और भूटान के बीच मजबूत विकास साझेदारी का एक हिस्सा है। इस नए ब्लॉक का निर्माण कॉलेज की बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने के लिए किया गया है।
भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा आज गेदू कॉलेज ऑफ़ बिज़नेस स्टडीज़ में एक नए एकेडमिक ब्लॉक के शिलान्यास समारोह में राजदूत शामिल हुए। पिछले एक दशक में जीसीबीएस को हॉस्टल, लाइब्रेरी, कम्युनिटी सेंटर बनाने, बड़े पैमाने पर मरम्मत और क्षमता-निर्माण में भारत से मिले सहयोग को आगे बढ़ाते हुए, यह नई सुविधा भूटान में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विकास में भारत-भूटान सहयोग को और बढ़ाएगी।
भूटान के चुखा जिले में स्थित गेदू कॉलेज भारत और भूटान के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और शैक्षिक सहयोग का एक प्रमुख प्रतीक है। इससे पहले भी भारत-भूटान विकास साझेदारी के तहत इस कॉलेज में लगभग 200 छात्रों के लिए दो गर्ल्स हॉस्टल ब्लॉक का निर्माण किया गया था, जिनका उद्घाटन दिसंबर 2022 में हुआ था। भारत सरकार ने पिछले एक दशक में कॉलेज परिसर के भीतर छात्रावासों, पुस्तकालय और सामुदायिक केंद्र के निर्माण में महत्वपूर्ण वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की है।
भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों में भूटान की निरंतर मदद करता रहा है। इस बानगी यहां भारत की मदद से एक और प्रोजेक्ट के शिलान्यास से देखी जा सकती है। दरअसल इसी दिन भूटान के युसिपांग में नेशनल सेंटर फ़ॉर हाइड्रोलॉजी एंड मीटियोरोलॉजी (एनसीएचएम) के नए मुख्यालय और वैज्ञानिक सुविधाओं का शिलान्यास भी किया गया, जिसकी स्थापना में भी भारतीय सहयोग शामिल है।
समारोह में भारत की ओर से मिशन के उप प्रमुख (डीसीएम) अनिकेत मांडवगने और भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव डॉ. जे. अरविंद भी उपस्थित थे। यह केंद्र राष्ट्रीय मौसम और बाढ़ चेतावनी केंद्र (एनडब्ल्यूएफडब्ल्यूसी) के रूप में कार्य करेगा, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के खतरों से सुरक्षा के लिए सटीक जानकारी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना है।
भारतीय दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, भारत की 'प्रोजेक्ट सहायता' के जरिए समर्थित यह परियोजना, 'शीघ्र चेतावनी प्रणालियों' और 'जलवायु अनुकूलन क्षमता' को मज़बूत करने में योगदान देगी। यह लोगों के जीवन की सुरक्षा करने और एक टिकाऊ भविष्य के निर्माण की दिशा में भारत-भूटान के संयुक्त प्रयासों को दर्शाता है।

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