फंसे प्रवासी मजदूरों को निकालने के लिए दो हफ्ते तक रोज चलेंगी सौ ट्रेनें

राष्ट्रीय , 517

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन की वजह से अलग अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को निकालने के लिए अगले दो हफ्ते तक रोज एक सौ श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। सरकार इसके लिए रणनीति बना ली गई है। गृह मंत्रालय ने इस योजना की जानकारी देते हुए सोमवार को यह भी बताया कि अभी तक 468 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से देश के विभिन्न जगहों पर फंसे पांच लाख प्रवासी मजदूरों, छात्रों, पर्यटकों को उनके घर तक पहुंचाया गया है।

गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को कहा कि अगले दो हफ्ते तक हर दिन कम से कम एक सौ श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी है। इसके लिए रणनीति तैयार की जा चुकी है। पैदल अपने घरों के लिए निकले लोगों को भी राज्य सरकारें बसों से उनके घर तक पहुंचाएंगी। श्रीवास्तव ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ सोमवार को बैठक हुई है। इसमें सभी को निर्देश दिया गया है कि वे प्रवासियों मजदूरों को हर संभव सहायता दें।

केंद्र सरकार के मंत्रालयों की साझा प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 4,213 मामले बढ़े हैं और 1,559 लोग ठीक हुए हैं। उन्होंने कहा कि रिकवरी रेट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और पिछले 11 दिनों में इसमें छह फीसदी का इजाफा हुआ है। एक मई को रिकवरी रेट 25.37 फीसदी थी जो अब 31.5 फीसदी पहुंच गई है। लव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमितों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक जिन लोगों में कम लक्षण हैं उन्हें अगर तीन दिन बुखार नहीं आता है तो उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। हालांकि ऐसे लोगों को सात दिनों तक आइसोलेशन में रखा जाएगा। वहीं जिन लोगों को पहले से एचआईवी जैसे इम्युनो समस्या हैं उन्हें पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही डिस्चार्ज किया जाएगा।

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