अद्भुत झोपड़ी : दस करोड़ में बिकने वाली झोपड़ी

परिवेश , 1060

अमरेन्द्र सहाय अमर
हर किसी की चाहत होती है कि उसका अपना एक निवास का ठिकाना हो . बडे लोग बडे बड़े बंगलों में रहते है. मध्यम श्रेणी के लोग, या नौकरी पेशा लोग अपनी ज़िन्दगी भर की कमाई से एक मध्यम श्रेणी का मकान बनवा पाते  है. गरीब गुरबा लोग झोपडी या झोपड़ पट्टी  में ही अपना गुज़ारा करते है.  दुनिया में कई आलीशान मकान है जो कि करोड़ों में बिकते हैं. लेकिन ऐसे करोड़ो के मकानों का स्थापत्य, सौंदर्य और सुविधाएँ उच्च कोटि की होती हैं. ऐसे करोड़ों के मकान तो एक आम आदमी के लिए स्वप्न सरीखा होता है.  आप एक छोटा सा मध्यम श्रेणी का फ्लैट खरीदो तो लाखो. करोड़ो कीमत लगती है . लेकिन क्या एक झोपडी की कीमत दस करोड़ हो सकती है. कोई भी इसे मानने को तैयार नही होगा कि झोपडी की कीमत दस करोड़. लेकिन यह सच है इंग्लैंड में एक ऐसी ही तालाब  के किनारे  पर स्थित झोपडी दस करोड़ में बिकी है . बाहर से सधारण सी दिखने वाली झोपडी में ऐसी क्या खासियत है कि वह दस करोड़ में बिकी.  झोपडी के बिकने  के बाद उसकी चर्चा चारो तरफ होने लगी कि झोपडी और दस करोड़ ? 
इस झोपडी के बिकने के बाद ही इसकी सच्चाई सामने आई ! तब लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ . बाहर से साधारण से झोपडी समान दिखने वाले मकान  की आंतरिक सजावट इतनी बढिया थी जो महलों की आंतरिक सजावट को फेल कर दे .इस झोपडी की आन्तरिक सजावट बड़े बड़े बंगलो को मात दे रहे थे. बताया जाता है यह झोपडी नही तीन तीन बड़े रूम वाला अच्छा खासा मकान है . वर्ष 1964 में इस झोपडी को बनाया गया था. वर्ष 2016 में इसके मालिक ने इसे इसी आंतरिक संरचना और सजावट पर बहुत पैसा खर्च किया .. वर्षों तक इस झोपड़ीनुमा मकान के सेलीब्रेटीज किराये पर रहते थे.  उस समय लोगों को लगा कि तालब के किनारे स्थित होने के कारण लोग यहाँ रहने आते है लेकिन इसकी आंतरिक सजावट के बारे में लोगों को पता नही था. जब इसकी आंतरिक सजावट के बारे में लोगों को पता तब लगा जब इसके मालिक ने इसे दस करोड़ में बेचा . इस झोपडीनुमा मकान के  मालिक  के अनुसार पहले यह झोपडी तीन करोड़ में बिकी थी लेकिन तब यहाँ अधिक  सुविधाएँ नही थी . इसके मालिक ने इसकी फोटो शेयर करते हुए लिखा  आप सब इसे मामूली झोपडी समझने की गलती कट्टी न करे . अगर करते हैं तो यह आपकी भूल होगी . इस भूल को सुधारने के लिए आपको एक बार इसकी आंतरिक सजावट को देखनी होगी .

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