गोमती नदी में छोड़ी गईं 50 हजार मछलियों की अंगुलिकाएं, जलीय जैव-विविधता के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

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**डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय निषाद की मौजूदगी में रिवर फ्रंट पर हुआ कार्यक्रम, मछुआरा समुदाय की आजीविका मजबूत करने पर सरकार का जोर**
 
**लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026।** गोमती नदी में जलीय जैव-विविधता के संरक्षण और मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को लक्ष्मण पार्क, रिवर फ्रंट पर ‘रिवर रैंचिंग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री मत्स्य डॉ. संजय कुमार निषाद की मौजूदगी में नदी में 50 हजार मत्स्य बीज अंगुलिकाओं का संचय किया गया।
 
उत्तर प्रदेश शासन के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वैज्ञानिक पद्धति से तैयार 80 से 100 मिलीमीटर आकार की मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को गोमती नदी में छोड़ा गया। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्य संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाना, स्थानीय एवं देशज मछली प्रजातियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करना और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में योगदान देना है।
 
## नदी संरक्षण में अहम है रिवर रैंचिंग: ब्रजेश पाठक
 
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नदी की पारिस्थितिकी प्रणाली के संरक्षण में रिवर रैंचिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे नदी संरक्षण और मत्स्य विकास कार्यक्रमों को मजबूती मिल सकती है।
 
उन्होंने कहा कि नदियों में मछलियों की संख्या बढ़ाने और जलीय जैव-विविधता के संरक्षण के साथ-साथ यह पहल मछुआरा समुदाय की आजीविका को सशक्त बनाने में भी सहायक हो सकती है। वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जनभागीदारी के समन्वित प्रयासों से प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
 
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के सम्मान, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा के लिए विभिन्न कदम उठा रही है, ताकि पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े लोगों को बेहतर अवसर मिल सकें।
 
## मछुआरों की आजीविका मजबूत करने पर जोर
 
मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार नदियों में मत्स्य संपदा के संरक्षण, जलीय जैव-विविधता को प्रोत्साहित करने और मछुआरा समुदाय की आजीविका मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
 
उन्होंने बताया कि रिवर रैंचिंग के तहत उपयुक्त मछली प्रजातियों की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में इससे मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
 
मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक मछुआरा समुदायों और मत्स्य पालकों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना भी है। प्राकृतिक जल संसाधनों का सतत उपयोग और जलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता बनाए रखना इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
 
## देशज मछली प्रजातियों के संरक्षण को प्रोत्साहन
 
रिवर रैंचिंग कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय और देशज मछली प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। प्राकृतिक नदियों में मत्स्य संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में योगदान दे सकता है।
 
कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव सुशील कुमार, उप निदेशक पुनीत कुमार, उप निदेशक उग्रसेन सिंह, उप निदेशक सृष्टि यादव सहित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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