खाद्य सुरक्षा के साथ फसल विविधीकरण व प्राकृतिक खेती को अपनाएं किसान: कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही
अन्य खबरे Oct 27, 2026 at 05:35 PM , 21रबी सत्र में 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज अनुदान पर और 10 लाख किसानों को मिलेंगे निःशुल्क दलहन-तिलहन मिनीकिट
देश के 11 प्रतिशत भू-भाग पर 22 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन कर रहा यूपी, 196 प्रतिशत फसल सघनता के साथ बना देश का सिरमौर
पराली जलाने से बचें, 600 सीबीजी प्लांट से बनाएं आमदनी का जरिया; उत्कृष्ट वैज्ञानिक, 9 केवीके व 7 प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित
लखनऊ, 27 अक्टूबर, 2026
उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि देश की मात्र 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर उत्तर प्रदेश लगभग 22 प्रतिशत खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन कर राष्ट्र के अन्न भंडार को सुदृढ़ता प्रदान कर रहा है। प्रदेश में फसल सघनता (क्रॉपिंग इंटेंसिटी) 196 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो वैश्विक स्तर की सघन कृषि पद्धतियों में शुमार है। कृषि मंत्री मंगलवार को आईसीएआर-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), लखनऊ के सभागार में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी "उत्पादकता से आगे: उत्तर प्रदेश की कृषि के भविष्य की पुनर्कल्पना" के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
श्री शाही ने कहा कि कृषि एक सतत प्रवाहमान क्षेत्र है, जिसमें विकास की असीम संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की आबादी 42 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ हो चुकी है और भारत आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में 80 करोड़ नागरिकों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने में पूर्णतः सक्षम है। ऐसे में राष्ट्रीय व वैश्विक खाद्य सुरक्षा को अक्षुण्ण रखते हुए उत्पादन और उत्पादकता को निरंतर बढ़ाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के प्रभावी प्रयासों से राज्य का 80 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित हो चुका है तथा नहरों के संजाल से खरीफ के साथ-साथ रबी व जायद फसलों के लिए भी किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
किसानों की उत्पादन लागत घटाने और आमदनी में वृद्धि सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि चालू रबी सत्र में 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को भारी अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के 4 लाख क्विंटल के सापेक्ष तीन गुना रिकॉर्ड वृद्धि है। इसके साथ ही गेहूं और गन्ने की पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करने तथा फसल विविधीकरण को गति देने के उद्देश्य से 10 लाख किसानों को दलहन व तिलहन के उन्नत बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से बाजार मांग और उच्च मूल्य आधारित फसलों (वैल्यू-बेस्ड एग्रीकल्चर) पर अनुसंधान केंद्रित करने का आह्वान किया, जिससे देश दलहन और खाद्य तेलों के उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बन सके।
मौसम की अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने उपकार और कृषि विश्वविद्यालयों को कम अवधि में तैयार होने वाली प्रजातियों तथा आपातकालीन फसल प्रबंधन तकनीकों को त्वरित गति से किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। मृदा में घटते ऑर्गेनिक कार्बन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने गोवंश आधारित गोबर, गोमूत्र और बायोमास आधारित प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप देने पर विशेष बल दिया।
धान कटाई के वर्तमान सत्र को दृष्टिगत रखते हुए उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील की और बताया कि प्रदेश में लगभग 600 कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे पराली और कृषि अवशेषों का सदुपयोग बायो-सीएनजी, कम्पोस्ट और मल्चिंग में संभव होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों को अतिरिक्त आय का साधन भी प्राप्त होगा। उन्होंने कृषि प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन में महिला किसानों तथा ग्रामीण युवाओं की सहभागिता बढ़ाने का भी आह्वान किया।
समारोह के दौरान कृषि अनुसंधान, तकनीकी प्रसार और नवाचारी कृषि पद्धतियों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, संस्थानों और कृषकों को कृषि मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट वैज्ञानिकों की श्रेणी में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के प्रसार निदेशक डॉ. राम बटुक सिंह तथा बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ. एन. के. बाजपेई को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के लिए 9 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को सम्मानित किया गया, जिनमें मेरठ केवीके के अधीन रामपुर एवं हस्तिनापुर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अधीन बरकछा (मिर्ज़ापुर), बांदा कृषि विश्वविद्यालय के अधीन बांदा, महोबा एवं झांसी, चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन कानपुर देहात एवं फतेहपुर तथा आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अधीन जौनपुर (प्रथम) केवीके शामिल रहे।
फसल विविधीकरण व नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 7 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इनमें काला नमक धान उत्पादन के लिए सिद्धार्थ नगर के श्री सुधीश नाथ शुक्ला, सीधी बिजाई विधि के लिए गाज़ीपुर के श्री अमरजीत सिंह, मक्का बीज उत्पादन के लिए बहराइच के श्री बुधई, ड्रैगन फ्रूट एवं स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए मिर्ज़ापुर की श्रीमती वंदना सिंह, संरक्षित खेती एवं मत्स्य पालन के लिए सहारनपुर के श्री राजेंद्र पुंडीर, अपराजिता की औषधीय खेती के लिए सीतापुर की श्रीमती सीता देवी तथा संकर मक्का बीज उत्पादन के लिए बहराइच के श्री जियाउल हक शामिल हैं। इसके साथ ही उपकार के वैज्ञानिक डॉ. रिन्नी सिंह (वैज्ञानिक अधिकारी - पादप प्रजनन एवं जैव प्रौद्योगिकी), डॉ. हिमांशु तिवारी (तकनीकी सचिव, डीजी उपकार) और श्री प्रेमचंद चौरसिया (वैज्ञानिक अधिकारी - एग्रोफोरेस्ट्री) को भी उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता उपकार के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता, बीज प्रमाणीकरण संस्था के उपाध्यक्ष श्री राधेश्याम सिंह, कृषि एवं अनुसंधान के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शनमुगा सुंदरम, उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय कुमार, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, वैज्ञानिक, प्रसार कार्यकर्ता, प्रगतिशील किसान और एफपीओ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।






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