*देश में चिप डिज़ाइन को लोकतांत्रिक बनाना* *कैसे चिपइन सेंटर पूरे देश के इंजीनियरों के लिए केंद्रीकृत चिप डिज़ाइन, निर्माण सुविधाएँ और विशेष प्रशिक्षण की पेशकश कर रहा है*

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*विवियन डेसाल्फ़िन*        

*(लेखक सी-डैक, बेंगलुरु में वैज्ञानिक-एफ हैं)*  

एक नये चिप की शुरुआत किसी छात्र, शोधकर्ता या उद्यमी के मन में एक विचार के रूप में हो सकती है। लेकिन उस विचार को अवधारणा से सिलिकॉन में बदलने के लिए महंगे सॉफ़्टवेयर, शक्तिशाली कंप्यूटर, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा तक पहुंच की जरूरत होती है। ज्यादातर कॉलेज और स्टार्ट-अप इस लागत को अकेले वहन नहीं कर सकते।
चिपइन सेंटर, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने सी-डैक, बेंगलुरु में स्थापित किया है, साझा राष्ट्रीय अवसंरचना और चिप डिज़ाइन समर्थन के माध्यम से इन बाधाओं को दूर करने में मदद कर रहा है। एक ही जगह से महंगे संसाधनों तक सुरक्षित ऑनलाइन पहुँच प्रदान करके, यह हर कॉलेज को महंगे उपकरण खरीदने और अलग अवसंरचना निर्माण करने की जरूरत से बचाता है।
500 संगठनों के 1 लाख से अधिक इंजीनियर, जिनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्ट-अप शामिल हैं, चिपइन सेंटर के इस साझा प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं, जिससे केंद्रीकृत चिप-डिज़ाइन सुविधा का यह सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार बन गया है।
व्यवहार में, चिपइन एक पेशेवर चिप-डिज़ाइन प्रयोगशाला को सीधे किसी छात्र के घर तक ले आता है। तकनीक केंद्र से दूर रह रहा एक छात्र प्रमुख संस्थानों के पास उपलब्ध उन्नत सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल कर सकता है। यह चिप डिज़ाइन को लोकतांत्रित बनाता है, जिससे प्रतिभा और विचार, न कि भौगोलिक स्थिति या वित्तीय ताकत, यह तय करते हैं कि कौन भाग ले सकता है।
चिपइन उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन स्वचालन (ईडीए) उपकरणों तक पहुँच प्रदान करता है, जिनका इस्तेमाल चिप डिज़ाइन करने, इसके परिपथ (सर्किट) का परीक्षण करने और यह देखने के लिए किया जाता है कि क्या इसका विनिर्माण किया जा सकता है। यह शक्तिशाली कंप्यूटिंग, पुन: उपयोग योग्य डिज़ाइन ब्लॉक्स और मानक डिज़ाइन तरीकों की भी पेशकश करता है। परम उत्कर्ष सुपरकंप्यूटर जटिल अनुकरण प्रणाली का समर्थन करता है, जबकि राष्ट्रीय प्री-सिलिकॉन सत्यापन, प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन का विनिर्माण से पहले परीक्षण करने में मदद करता है।
सिर्फ उपकरण प्रत्येक समस्या का समाधान नहीं कर सकते। एक छोटी-सी गलती भी चिप को असफल कर सकती है। इसलिए, चिपइन, प्रशिक्षण, तकनीकी समर्थन और विनिर्माण अनुपालन जांच प्रदान करता है। इसके विशेषज्ञ इस बात की जांच करते हैं कि क्या डिजाइन, विनिर्माण केंद्र के नियमों का पालन करता है, क्या इसके कल-पुर्जे सही तरीके से जुड़े हैं और क्या यह विनिर्माण के लिए तैयार है। डिज़ाइन करने वाले को फीडबैक मिलता है और वे अपने काम में सुधार करते हैं, जब तक कि यह आवश्यक मानकों को पूरा न कर ले। लोकतंत्रीकरण का सबसे स्पष्ट उदाहरण है – बहु-परियोजना वेफर (एमपीडब्लू) सेवा, जो एक कार्य-पद्धति है, जिसका उपयोग यूरोप में यूरोप्रैक्टिस और अमेरिका में एमओएसआईएस द्वारा भी किया जाता है। चूंकि संपूर्ण सेमीकंडक्टर वेफर बनाना महंगा है, इसलिए, चिपइन कई संस्थानों के डिजाइन की जांच करता है और उन्हें एक वेफर पर एक साथ रखता है। हर संस्थान एक छोटे हिस्से का इस्तेमाल करता है और लागत साझा करता है। वेफर का निर्माण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) में होता है और तैयार चिपों को उनके डिज़ाइन करने वालों को परीक्षण के लिए वापस भेज दिया जाता है।
ऐसी आठ साझा-वेफर अब तक 205 डिज़ाइनों को संस्थानों से एससीएल मोहाली तक ले जा चुकी हैं। चिपइन ने विदेशी विनिर्माण केन्द्रों में 100 से अधिक टेप-आउट्स को भी सक्षम किया है। टेप-आउट वह चरण है, जब पूरा डिज़ाइन विनिर्माण के लिए भेजा जाता है। यह कार्यक्रम लगभग एक लाख छात्रों और इंजीनियरों तक पहुँच चुका है और चार करोड़ घंटे से अधिक समय तक डिज़ाइन टूल का उपयोग हुआ है, जो दर्शाता है कि चिप डिज़ाइन कक्षा की सीख से वास्तविक सिलिकॉन अनुभव की ओर आगे बढ़ रहा है।
इसका लाभ केवल आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है। एक छात्र विचार से लेकर काम करने वाली चिप तक की यात्रा का अनुभव कर सकता है। एक प्रोफ़ेसर महंगी प्रयोगशाला बनाए बिना व्यावहारिक डिज़ाइन के बारे में पढ़ा सकते हैं। एक स्टार्ट-अप एक विचार का परीक्षण कर सकता है और उत्पाद विकास के लिए पैसे बचा सकता है। उद्योग को ऐसे इंजीनियर मिलते हैं, जो वास्तविक डिज़ाइन और निर्माण की आवश्यकताओं को समझते हैं।
भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के लिए न केवल निर्माण क्षमता की जरूरत है, बल्कि ऐसे लोग भी चाहिए, जो उन चिप्स को डिजाइन कर सकें, जिन्हें विनिर्माण केंद्र बनाएंगे। उपकरण, कंप्यूटिंग, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ सहायता, अनुपालन जांच और विनिर्माण पहुँच को एकीकृत करके, चिपइन दुर्लभ संसाधनों को साझा राष्ट्रीय क्षमता में बदल रहा है। चिप-डिज़ाइन अवसंरचना को हर दरवाजे तक पहुंचाकर, चिपइन सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की अगली बड़ी चिप देश की किसी भी कक्षा, प्रयोगशाला या स्टार्ट-अप से सामने आ सकती है।   


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