'पुस्तकालयों की संस्कृति को फिर से जीवित करना होगा, केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें विद्यार्थी' : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
जनपत की खबर Jul 26, 2026 at 12:07 PM , 22**आगरा।** उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ** ने कहा कि बदलते समय में अध्ययन की संस्कृति कमजोर होती जा रही है। आज विद्यालयों और महाविद्यालयों में पठन-पाठन का वह वातावरण दिखाई नहीं देता, जो पहले हुआ करता था। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से पुस्तकालयों की उपयोगिता बढ़ाने तथा पाठ्यक्रम के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और समसामयिक विषयों के अध्ययन पर भी विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री सोमवार को जनपद आगरा में आयोजित **'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना'** के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता और अध्ययन की बदलती प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि **"जब हम विद्यार्थी थे, तब हमें पुस्तकों के साथ-साथ प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ने की प्रेरणा दी जाती थी। पाठ्यक्रम के अतिरिक्त विषयों की जानकारी के लिए रेफरेंस बुक्स का अध्ययन भी आवश्यक माना जाता था। इससे ज्ञान का दायरा व्यापक होता था और सोच विकसित होती थी।"**
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालयों की स्थिति चिंताजनक है। **"आज अनेक पुस्तकालय वीरान पड़े हैं। न शिक्षक वहां जाते हैं और न ही विद्यार्थी। यह स्थिति शिक्षा जगत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।"**
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। इसके लिए नियमित अध्ययन, पुस्तकालयों का उपयोग, समाचार पत्रों का अध्ययन और विभिन्न विषयों पर पढ़ने की आदत विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि यही आदत उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।































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