शिक्षा सुधार के लिए योगी सरकार का फोकस: कक्षा-कक्ष में प्रभावी शिक्षण और हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

जनपत की खबर , 20

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कक्षा-कक्षीय व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने ‘टीएलपीएस रिपोर्ट-2025’ का विमोचन किया तथा ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस’ संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों से सीधे संवाद किया।
कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा सुधार केवल नीतियां बनाने से संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक शिक्षक द्वारा कक्षा में अपनाई जाने वाली प्रभावी शिक्षण पद्धतियों से ही वास्तविक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार बच्चों का जुड़ाव है। शिक्षकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार अपनाते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचानी होगी।
उन्होंने स्कूल चलो अभियान, नियमित छात्र उपस्थिति, कैच-अप लर्निंग, निपुण उत्तर प्रदेश और प्रभावी शिक्षण पर विशेष निर्देश दिए।


स्कूल चलो अभियान में शत-प्रतिशत नामांकन पर जोर
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत तीन वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक बच्चे को बाल वाटिका से जोड़ा जाना चाहिए और छह वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के नामांकन की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


नियमित उपस्थिति और कैच-अप लर्निंग पर विशेष ध्यान
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बच्चों की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए।
सत्र प्रारंभ से ही कैच-अप लर्निंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए, ताकि सीखने में पीछे रह गए बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग मिल सके।


निपुण लक्ष्यों की नियमित समीक्षा
उन्होंने बताया कि निपुण उत्तर प्रदेश का विस्तार अब कक्षा 1-2 से बढ़ाकर कक्षा 3-5 तक किया जा रहा है। शिक्षकों को निपुण लक्ष्यों की नियमित समीक्षा, परिणामों का विश्लेषण और अभिभावकों के साथ प्रगति साझा करने पर जोर दिया गया।


लेखन कौशल और स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर जोर
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण परख (PARAKH) के निष्कर्षों के अनुसार लेखन कौशल में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। शिक्षकों को प्रतिदिन स्वतंत्र पठन और स्वतंत्र लेखन की गतिविधियां कराने तथा बच्चों को अपने विचार लिखने के अवसर देने के निर्देश दिए गए, जिससे उनकी रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच विकसित हो सके।
अभिभावक और समुदाय की भागीदारी जरूरी
विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी को शिक्षा सुधार का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड का प्रभावी उपयोग करते हुए बच्चों की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से अभिभावकों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

शिक्षक संकुल बैठकों को बनाया जाए अनुभव साझा करने का मंच

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि शिक्षक संकुल बैठकें केवल औपचारिक बैठक न रहकर अनुभव साझा करने का प्रभावी मंच बनें। इनमें शिक्षक अपनी सफल शिक्षण विधियां, नवाचार और व्यावहारिक अनुभव साझा करें।
15 जून को जारी विभागीय पत्र में बताए गए दस प्रमुख शिक्षण बिंदुओं पर प्रत्येक शिक्षक संकुल बैठक में विस्तार से चर्चा करने के निर्देश भी दिए गए।
कार्यक्रम में आयोजित पैनल चर्चा के दौरान कक्षा-कक्षीय शिक्षण को मजबूत बनाने, प्रभावी शिक्षण अभ्यासों, सहायक पर्यवेक्षण, निपुण सूची एवं तालिका के उपयोग तथा मध्य स्तरीय शैक्षणिक नेतृत्व की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने विद्यालयों में किए गए नवाचारों, पठन अभियान और निपुण कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के अनुभव भी प्रस्तुत किए।

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