उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ, ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ योजना पर विशेष फोकस
जनपत की खबर Feb 07, 2026 at 03:40 PM , 89लखनऊ।
मा0 मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं एवं उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम स्तर पर लाने हेतु दिये गये निर्देशों के क्रम में पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में यातायात निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं।
इसी क्रम में पुलिस मुख्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ स्थित अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में यातायात निदेशालय, उ0प्र0 एवं इन्स्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन (IRTE), फरीदाबाद, हरियाणा के सहयोग से दिनांक 07 फरवरी 2026 को दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया।
यह कार्यशाला प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है, जिसमें सड़क सुरक्षा के पाँच प्रमुख स्तम्भ— एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर एवं इनवायरनमेंट— पर विशेष रूप से बल दिया गया है।
सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को न्यूनतम करने हेतु प्रदेश में नवम्बर माह से ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD)’ योजना लागू की गई थी। इसके प्रथम चरण में 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों के अंतर्गत 89 क्रिटिकल कॉरिडोर एवं 3233 क्रिटिकल क्रैश लोकेशनों का चिन्हांकन कर सुनियोजित कार्यवाही की गई, जिसके परिणामस्वरूप उल्लेखनीय एवं सकारात्मक परिणाम सामने आए।
प्रथम चरण की सफलता को देखते हुए ZFD कार्यक्रम के द्वितीय चरण में प्रदेश के शेष 55 जनपदों के सर्वाधिक दुर्घटना-प्रभावित 245 क्रिटिकल थानों का चयन किया गया है। इस दो दिवसीय कार्यशाला में इन जनपदों से 44 राजपत्रित यातायात अधिकारी, 55 निरीक्षक/उपनिरीक्षक यातायात तथा 55 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारी प्रतिभाग कर रहे हैं। इन्हें IRTE के अध्यक्ष डा0 रोहित बलूजा एवं उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा सड़क दुर्घटना जांच एवं विवेचना की नवीनतम वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण ने अपने उद्बोधन में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता और प्रभावी प्रवर्तन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात जागरूकता केवल नवंबर माह तक सीमित न रहकर पूरे वर्ष चलनी चाहिए। नगर निगमों के सहयोग से ब्लैक स्पॉट्स पर स्थायी होर्डिंग्स एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार को उन्होंने जीवन रक्षा के लिए आवश्यक बताया।
उन्होंने अलीगढ़–बुलंदशहर, कानपुर–हमीरपुर एवं लखनऊ–सीतापुर मार्गों पर ZFD पायलट प्रोजेक्ट की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्रित पेट्रोलिंग एवं दुर्घटनाओं के कारणों की गहन जांच से मात्र दो महीनों में दुर्घटनाओं में 30 से 58 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारी जुर्माने से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हर उल्लंघन पर निश्चित दंड सुनिश्चित हो, जिससे नियमों के प्रति जवाबदेही बने। तकनीकी पहलों के अंतर्गत ओवर-स्पीडिंग पर मोबाइल अलर्ट, एआई आधारित कैमरे एवं स्वचालित चालान प्रणाली को और अधिक व्यावहारिक बनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान IRTE अध्यक्ष डा0 रोहित बलूजा ने सड़क दुर्घटना जांच में पुलिस एवं परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना जांच वैज्ञानिक, तथ्य-आधारित एवं तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए तथा केवल “तेज रफ्तार” या “लापरवाही” जैसे सामान्य शब्दों से बचना चाहिए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता को मोटर वाहन अधिनियम से जोड़कर मजबूत कानूनी प्रकरण तैयार करने का सुझाव भी दिया।
अंत में उन्होंने ‘जीरो फैटेलिटी’ लक्ष्य की प्राप्ति हेतु मुरादाबाद पुलिस अकादमी की तर्ज पर “ट्रेनर्स को ट्रेन” मॉडल अपनाने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में निदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) श्री ए0 सतीश गणेश द्वारा प्रतिभागियों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं जनहानि न्यूनतम करने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई।































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