वाराणसी में ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बोले— ग्राम पंचायतें बनेंगी ग्रामीण विकास की सबसे मजबूत कड़ी

जनपत की खबर , 19

वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 'पंच सम्मेलन' का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य 'वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्राम पंचायतों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ बनाना था। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के लगभग 500 ग्राम पंचायत प्रधानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने काशी प्रेरणा कैंटीन, रबर चप्पल निर्माण इकाई, महिला परिधान स्टॉल और वाराणसी लाल भरवा मिर्च उत्पादों का निरीक्षण करते हुए महिलाओं के आत्मनिर्भरता प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रहे हैं।

अपने संबोधन में केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में ग्रामीण भारत के विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब मजदूरों की मजदूरी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में पहुंचेगी, जिससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी।

उन्होंने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए प्रत्येक नागरिक से अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। इस अवसर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम गति शक्ति पोर्टल पर गांवों की सड़कें, तालाब, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और विकास कार्यों का पूरा विवरण उपलब्ध रहेगा, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने बताया कि महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को 20 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही सरकारी भूमि पर महिला समूहों के लिए लघु उत्पादन इकाइयों और छोटे उद्योग स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 'वीबी-जी राम जी योजना' के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी मिलेगी। रोजगार की मांग के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। समय पर मजदूरी का भुगतान न होने पर 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से मुआवजा दिया जाएगा तथा यदि कार्यस्थल गांव से 5 किलोमीटर से अधिक दूर होगा तो मजदूरों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान भी मिलेगा। योजना में जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सम्मेलन में जीआईजेड (GIZ), प्रदान (PRADAN) और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) द्वारा ग्राम पंचायतों की भूमिका, सुशासन, डिजिटल तकनीक, जनभागीदारी और पारदर्शिता पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हंसराज विश्वकर्मा, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, डॉ. सुनील पटेल, ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी, संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्राम पंचायत प्रधान उपस्थित रहे।

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