जैन धर्म जीवन जीने की पूर्ण कला है, इसके पंच महाव्रत आज भी प्रासंगिक : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
राष्ट्रीय Feb 06, 2026 at 03:05 PM , 142डीडवाना-कुचामन/जयपुर, 6 फरवरी।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैन धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण और व्यावहारिक कला है। जैन धर्म के पंच महाव्रत आज के भौतिकवादी युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे। उन्होंने कहा कि संत, मुनि और महंत समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं और हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति को विश्वभर में पहुँचाते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।
मुख्यमंत्री श्री शर्मा शुक्रवार को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आयोजित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी का राजस्थान में पदार्पण राज्य के लिए सम्मान और गौरव का विषय है। जैन विश्व भारती द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अत्यंत भव्य और प्रेरणादायी है। नवनिर्मित सुधर्मा सभा आने वाले समय में मानवीय मूल्यों और धार्मिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
अहिंसा का संदेश मानवता के लिए पथप्रदर्शक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म का अहिंसा का संदेश आज प्रकाश स्तंभ की तरह संपूर्ण मानवता को दिशा दिखा रहा है। ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत आज पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन ने सदैव प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की शिक्षा दी है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के दौर में जैन धर्म के संयम और सादगी के सिद्धांत मानवता के भविष्य को सुरक्षित करने का मार्ग दिखाते हैं।
पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी प्रेरणास्रोत
श्री शर्मा ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी मानवीय मूल्यों के सजीव प्रतीक हैं। उनकी साधना, ज्ञान और त्याग लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण और धर्म प्रचार के लिए समर्पित किया है। आचार्यश्री ने जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर समाज को नई दिशा प्रदान की है। उनकी शिक्षाओं की सरलता और व्यावहारिकता हर वर्ग तक पहुँचती है।
जैन विश्व भारती का बहुआयामी योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन विश्व भारती ने धर्म, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया है। आचार्य तुलसी के पश्चात आचार्य महाप्रज्ञ ने इस परंपरा को और सशक्त किया। यह संस्थान जैन दर्शन के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यहाँ विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। जैन विश्व भारती देश-विदेश में भारतीय संस्कृति और जैन दर्शन का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर रही है। उन्होंने कहा कि सुधर्मा सभा मानवीय मूल्यों का एक मंदिर है, जहाँ से सत्य, अहिंसा और करुणा का संदेश दूर-दूर तक फैलेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा जैन विश्व भारती में नवनिर्मित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल का लोकार्पण किया। समारोह में साध्वी प्रमुखा श्रीजी विश्रुत विभा, मुनि श्री महावीर कुमार, साध्वी वर्या श्री सम्बुद्ध यशा जी, राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक श्री गुलाब कोठारी, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष श्री अमरचंद लुंकड़ सहित जैन मुनि-साध्वी, संस्थान के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आमजन उपस्थित रहे।






























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