पलायन से परावर्तन तक: योगी सरकार के पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश बना रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का नया मॉडल
जनपत की खबर Jan 20, 2026 at 04:58 PM , 85लखनऊ। उत्तर प्रदेश, जो कभी रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले राज्यों में गिना जाता था, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का सशक्त मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। बीते पौने नौ वर्षों में सरकार की नीतियों का असर अब स्पष्ट रूप से जमीन पर दिखाई देने लगा है। जहां पहले युवा और श्रमिक रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने को मजबूर थे, वहीं अब उन्हें अपने घर के पास ही पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं।
स्थिति यह है कि पहले राज्य से बाहर जा चुके कई युवा और श्रमिक अब उत्तर प्रदेश लौट रहे हैं। पलायन की जगह अब ‘परावर्तन’ ने ले ली है, जो प्रदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है।
रोजगार सृजन से पलायन पर लगा ब्रेक
योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, एमएसएमई के विस्तार, सेवायोजन मेलों और कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है और लाखों युवाओं को सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित ‘सेवामित्र’ पोर्टल पर 53 हजार से अधिक कुशल कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है।
औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर बने विकास की रीढ़
‘इन्वेस्ट यूपी’ के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाओं और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और लॉजिस्टिक्स हब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को जिलों तक पहुंचाया है।
आज उत्तर प्रदेश रोजगार और फैक्ट्री इकाइयों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में 30 हजार से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जबकि वर्ष 2017 तक यह संख्या आधी से भी कम थी। इससे युवाओं, श्रमिकों और महिलाओं को उनके गृह जनपदों में ही स्थायी रोजगार के अवसर मिले हैं।
श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से मजबूत हुआ भरोसा
योगी सरकार ने रोजगार के साथ-साथ श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में निराश्रित हुए बच्चों के लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100 बालक-बालिकाओं को निःशुल्क आवासीय शिक्षा की सुविधा दी जा रही है।
दुर्घटना, मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक संबल
श्रमिकों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये, स्थायी दिव्यांगता पर 3 लाख रुपये, आंशिक दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये, पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना से मृत्यु पर 5 लाख रुपये, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये, 25 हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता तथा अपंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना या मृत्यु पर 1.25 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। इन प्रावधानों से श्रमिकों की असुरक्षा में उल्लेखनीय कमी आई है।
पेंशन, बैंकिंग और परिवार सुरक्षा योजनाएं
प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, अटल पेंशन योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना तथा निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना से लाखों श्रमिक लाभान्वित हो रहे हैं। कन्या विवाह सहायता योजना के तहत दो बालिकाओं के विवाह पर 55 हजार से 61 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत प्रदेश में 9.52 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। वहीं, निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में इलाज का सौ प्रतिशत व्यय प्रतिपूर्ति किया जा रहा है। इससे श्रमिक परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उत्तर प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही हैं।
कुल मिलाकर, रोजगार, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा के मजबूत ढांचे ने उत्तर प्रदेश को पलायन से परावर्तन की दिशा में अग्रसर किया है और प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।































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