उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार में पांच दिवसीय अभिलेख–पाण्डुलिपि अभिरुचि कार्यशाला का शुभारम्भ

जनपत की खबर , 93

लखनऊ। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील नीति के अनुरूप तथा संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की अभिलेख संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के क्रम में उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार, लखनऊ में 19 से 23 जनवरी, 2026 तक पांच दिवसीय अभिलेख/पाण्डुलिपि अभिरुचि कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला का शुभारम्भ सोमवार, 19 जनवरी, 2026 को मुख्य अतिथि डॉ. राजमणि, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (अभिलेख), राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. अमलेश कुमार मिश्र, निदेशक, हिस्ट्री डिवीजन, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. राजमणि ने ‘इतिहास में शोध के नवीन आयाम एवं वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर शोधार्थियों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोध कार्य में प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्रोतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शोध ग्रंथ तैयार करने की विधियों को साझा किया। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया एवं इंटरनेट से प्राप्त सूचनाओं की सत्यता की जांच के बाद ही उनके उपयोग पर बल दिया।
डॉ. राजमणि ने बताया कि अभिलेखागार के क्षेत्र में सरकारी के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। वर्तमान में देश के सभी राज्यों में अभिलेखागार स्थापित हैं और निजी क्षेत्र में भी गोदरेज, टाटा, सीईपीटी, विभिन्न बैंक, विश्वविद्यालय आदि अपने-अपने आर्काइव्स विकसित कर रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक अभिलेखागार श्री अमित कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि यह कार्यशाला का द्वितीय चरण है, जबकि प्रथम चरण जून, 2025 में आयोजित किया गया था। उन्होंने जानकारी दी कि इस कार्यशाला के लिए 700 से अधिक अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया था, जिनमें से 200 प्रतिभागियों का चयन किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में पाण्डुलिपियों का सर्वे कराया जाना है। सर्वे के दौरान प्राप्त पाण्डुलिपियों का डिजिटाइजेशन कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा तथा आवश्यकता के अनुसार उनका संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने वक्ताओं से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका संतोषजनक उत्तर दिया गया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक और अत्यंत उपयोगी बताया।

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