CM योगी ने विधानसभा में राज्यपाल अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव दिया
जनपत की खबर Feb 24, 2025 at 05:47 PM , 215लखनऊ।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कुल 146 सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें सत्ता पक्ष के 98 और विपक्ष के 48 सदस्य शामिल थे। सभी ने अपने विचारधारा और सोच के आधार पर मुद्दे उठाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अब समाजवादी से सनातनी हो गए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने सदस्यों को सनातन धर्म को लेकर टोका, यह देखकर अच्छा लगा।
CM योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "आप संविधान की बात करते हैं, लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर आपकी टिप्पणियां और राज्यपाल के प्रति आपका व्यवहार क्या संवैधानिक था? यदि यह संवैधानिक था, तो असंवैधानिक क्या है?"
उन्होंने समाजवादी पार्टी की सोशल मीडिया गतिविधियों पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष भाषण तो बहुत देता है, लेकिन उनके विचार, भाषा और व्यवहार को देखना हो तो समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल को देखिए।
महाकुंभ और सनातन पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने महाकुंभ और अयोध्या पर चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छा लगा कि विपक्ष ने महाकुंभ और अयोध्या को स्वीकार किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "मान्यता यही है कि जब समाजवादी अंतिम पायदान पर खड़ा होता है, तो उसे धर्म की याद आती है!"
उन्होंने यह भी बताया कि इस बार विपक्ष के नेता महाकुंभ में स्नान करने गए और व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की। उन्होंने माना कि महाकुंभ में यदि विश्वस्तरीय व्यवस्था न होती, तो अब तक 63 करोड़ श्रद्धालु न आते। उन्होंने यह भी कहा कि 26 फरवरी तक यह संख्या 65 करोड़ पार कर जाएगी।
सनातन और अन्य पंथों के प्रति सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की 144 करोड़ की जनसंख्या में से 110 करोड़ लोग सनातन धर्म को मानते हैं। सरकार सनातन धर्म के साथ-साथ बौद्ध, जैन सहित सभी पंथों के पुनरुद्धार के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने 26 दिसंबर को वीर साहिबजादा दिवस के रूप में मनाए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार जैन तीर्थंकरों के प्रति भी श्रद्धा भाव रखती है।
महाकुंभ में भेदभाव के आरोप पर जवाब
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि महाकुंभ में किसी जाति विशेष के लोगों को रोका नहीं गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की, तो उसे अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में सनातन के प्रति श्रद्धा नहीं थी, इसलिए उन्होंने एक गैर-सनातनी को कुंभ का प्रभार दिया था। जबकि वर्तमान सरकार ने स्वयं इस आयोजन की निगरानी की, जिससे महाकुंभ में स्वच्छता और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।































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