गुरु पूर्णिमा पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में आशीर्वचन देते गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ
जनपत की खबर Jul 21, 2024 at 06:25 PM , 31021 जुलाई, 2024 गोरखपुर। गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर श्रीगोरखनाथ मन्दिर स्थित महन्त दिग्विजय नाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित साप्ताहिक श्रीरामचरित मानस कथा के समापन दिवस एवं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री परम पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति जितनी समृद्ध व प्राचीन है इसके पर्व व त्यौहार भी उतने ही प्राचीन व समृद्ध हैं।
आज जिस वैदिक साहित्य का अध्ययन हम करते हैं यह हमारे तपस्वी ऋषि वेदव्यास जी के तप के कारण ही सम्भव हैं। हम सभी उनके अवतरण दिवस को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते चले आ रहे हैं।
हमारे गुरु, पुरोहित, शिक्षक, माता, पिता, बड़े भाई आदि इसी परंपरा के संवाहक होते हैं। हमारे गोत्रों की लंबी परंपरा भी हमारे ऋषियों से जुड़ी हुई है और इसका उद्देश्य भी कल्याण भाव से ओतप्रेत है।
उन्होंने कहा गुरु, पुरोहित, शिक्षक, पिता, बड़े भाई आदि हमारे समाज व हमारे उत्कर्ष की चिंता करते हैं और हम भी उनके सम्मान को उसी रूप में करते चले आ रहे हैं। हमारे गोत्रों की परंपरा भी हमारे ऋषियों से जुड़ी हुई है, इसके पीछे का उद्देश्य भी कल्याण भाव ही है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम नें अपने जीवन में मर्यादा को महत्व दिया। जीवन जीने का तरीका हमें भगवान श्री कृष्ण ने दिया। निष्काम कर्म करते रहना ही हमारा ध्येय होना चाहिए। हमारी गुरु परंपरा भी यही बात कहती है- "अवश्यमेव भोगतव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम् मानव को अपने किए हुए कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है वह कर्म चाहे सुख फल देने वाला हो अथवा अशुभ फल देने वाला हो। सच्चा गुरु वही है जो सच्चे मार्ग पर चलने की सीख देता हो। लोक कल्याण के लिए जो हम संग्रह करते हैं सच्चे अर्थों में वही मंगलकारक है। हमें अपने कर्मों के माध्यम से ही स्वयं को सर्वश्रेष्ठ साबित करना होगा।
उन्होंने कहा कि हमें शॉर्टकट मार्ग छोड़कर स्थायी मार्ग अपनाना होगा होगा। शास्त्रों के वचनों का पालन करते हुए ऋषि परंपरा व अवतारी पुरुषों के आदर्शों को हमें अपने जीवन में उतरना होगा।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की पांच हजार की लंबी परंपरा को महर्षि व्यास ने उसी समय देख लिया था व मानव के जीवन को सहज व सरस बनाने के निमित्त शास्त्रों का संग्रह कर वर्तमान पीढ़ी के कल्याण के मार्ग को प्रशस्त कर दिया। दुनिया में किसी भी मत-पंथ की इतनी लंबी परंपरा व इतना प्राचीन इतिहास नहीं रहा है। महर्षि व्यास द्वारा रचित श्रीमद् भागवत पुराण जीव मात्र के मोक्ष का साधन बन जाता है। आज के दिन भगवान स्वरूप ऋषि व्यास जी के प्रति हम सभी को कृतज्ञता का भाव व्यक्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा एक ही गोत्र अनेक जातियों के पास है, ऋषि परंपरा हमें जातियों में बटना नहीं सिखाती। हमारे जीवन का एक-एक क्षण हमारे देश व समाज के लिए अर्पित होना चाहिए, यही गुरु परंपरा के प्रति हमारी सच्ची कृतज्ञता होगी।
उन्होंने कहा कि गोरक्ष पीठ की लंबी परंपरा हजारों वर्षों से लोक कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करती चली आ रही है।
कथा व्यास सन्त हृदय बालकदास जी महाराज ने कहा भगवान का जन्म ही जन कल्याण के लिए होता है। भगवान राम भी जन कल्याण हेतु इस नवधा भक्ति में यही नौ भक्ति का वर्णन करते हैं,कोई भी मनुष्य इन नौ भक्ति में से किसी भी एक भक्ति का सहारा पकड़ लेता है तो उसका कल्याण निश्चित है ।
उन्होंने शबरी प्रसंग में नवधा भक्ति के उपदेश की मार्मिक व्याख्या की।
उन्होंने नवधा भक्ति के अन्तर्गत प्रथम भक्ति - संत सत्संग की व्याक्या करते हुए कहा कि संत मिलन से मूढ़ मान्यताएं टूटती हैं। संत वे होते हैं जिनके पास बैठने पर हमारे अंतःकरण में ईश्वर के प्रति जिज्ञासा पैदा होती है।
दूसरी भक्ति रति की व्याख्या करते हुए
उन्होंने कहा की भगवान के लीला-प्रसंगों का चिंतन व गुणगान भक्ति साधना का सबसे सुलभ मार्ग है। भक्ति से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है। इसलिए भगवान पर पूरा विश्वास करते हुए उनकी सच्ची भक्ति करनीं चाहिए।
उन्होनें कहा कि भगवान श्री राम नें सद्गुरु की सेवा को जिस भक्ति के रुप में बतायी वह भक्ति उनके पूरे जीवन काल में दिखती है, चाहे गुरु विश्वामित्र की सेवा के लिए वन में ताड़का वध हो या फिर अहिल्या का उद्धार हो सभी में गुरु की ही आज्ञा का पालन किया है। यही गुरु के प्रति सच्ची भक्ति है। जनकपुर में प्रवास के दौरान भी बिना गुरु की आज्ञा के भगवान श्री राम ने कुछ नहीं किया ।
कथा के अन्त में पूज्य योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा व्यास पीठ की आरती की गयी। पीठ के प्रधान पुजारी योगी कमल नाथ जी महाराज तथा देवीपाटन के महंत मिथिलेश दास जी द्वारा साधु संतो तथा आचार्यगण का पूजन किया गया। भजन गायक राकेश श्रीवास्तव तथा उनकी टीम द्वारा गुरु वंदना तथा अनेक भजन प्रस्तुत किया गया।
संचालन श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ॰ अरविन्द चतुर्वेदी ने किया।
इस अवसर पर कालीबाडी
महन्त रविन्द्रदास, हनुमान मन्दिर महन्त रामदास, योगी धर्मेन्द्रनाथ, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. यु. पी. सिंह, सांसद रवि किशन, ग्रामीण विधायक विपिन सिंह, पिपराइच विधायक महेंद्र पाल सिंह , विधायक डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, डीडीयू कुलपति प्रो. पूनम टंडन, विधायक राजेश त्रिपाठी, विधायक प्रदीप शुक्ल, महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता, जिला अध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह सहित यजमानगण, सन्तगण व बड़ी संख्या श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।































Comments