अदभुत नदी : जो उल्टी दिशा में बहती है

हेडलाइंस , 637

कहते हैं कि भारत की अधिकतर नदियां पश्चिम से पूर्व की दिशा में बहती हैं. लेकिन  हमारे देश में एक नदी ऐसी भी है, जो पश्चिम से पूर्व न बह कर, पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती है. विपरीत दिशा में बहने वाली इस नदी का नाम है नर्मदा. नर्मदा नदी का एक अन्य नाम रेवा भी है.
गंगा सहित जहाँ तमाम  नदियां  पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, वहीं नर्मदा नदी बंगाल की खाड़ी की बजाय अरब सागर में जाकर मिलती है. नर्मदा नदी भारत के मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली मध्य प्रदेश और गुजरात की एक प्रमुख  नदी है, जो मैखल पर्वत के अमरकंटक शिखर से निकलती है. इस नदी के उल्टा बहने का भौगोलिक कारण इसका रिफ्ट वैली में होना है, जिसकी ढाल विपरीत दिशा में होती है. इसलिए इस नदी का बहाव पूर्व से पश्चिम की ओर है. सारी नदियों के विपरीत नर्मदा नदी के उल्टा बहने के पीछे पुराणों में कई कहानियां भी बताई गई हैं.                                               कहा जाता है कि राजकुमारी नर्मदा को प्यार  में धोखा मिलने  के कारण ही उल्टे दिशा में चलना प्रारंभ कर दिया.
राजकुमारी नर्मदा राजा मेखल की पुत्री थी. राजा मेखल ने अपनी लड़की नर्मदा की शादी के लिए एक शर्त रखी कि जो भी व्यक्ति "गुलबकावली" के फूल ले कर आएगा, उससे ही वह अपनी लड़की नर्मदा का विवाह करेंगे. इस शर्त को राजकुमार सोनभद्र ने पूरा कर दिया, जिसके नर्मदा का विवाह उनसे तय हो गया, लेकिन राजकुमारी नर्मदा ने राजकुमार सोनभद्र को देखा नही था.
लेकिन उनकी वीरता और सौन्दर्य के कई किस्से राजकुमारी  नर्मदा ने सुन रखे थे. इसी वजह से राजकुमारी नर्मदा को  सोनभद्र से  दिल ही दिल में प्यार हो गया. एक दिन नर्मदा ने अपनी दासी जुहिला के हाथ राजकुमार सोनभद्र को प्रेमपत्र भिजवाया. दासी जुहिला ने इस कार्य को करने के बदले राजकुमारी के कपडे़ मांगे. और राजकुमारी के कपडे़ पहन कर जुहिला राजकुमार सोनभद्र के पास चली गई. जुहिला के मन में राजकुमार को देख कर खोट आ गई और जिसके कारण उसने अपने असली स्वरुप के बारे में राजकुमार को  नहीं बताया.
सोनभद्र ने धोखे में जुहिला को ही राजकुमारी मान लिया. जब काफी समय बीतने के बाद भी जुहिला नहीं आई तो राजकुमारी नर्मदा से रहा नहीं गया वह स्वयं राजकुमार सोनभद्र के राज्य में चली गई. वहां जब राजकुमारी नर्मदा ने  अपनी दासी  जुहिला तथा सोनभद्र को साथ में देखा तो वह बहुत क्रोधित  हो गई और कभी वापस न आने के लिए पलट गई. जब सोनभद्र को वास्तविकता का पता चला तो वे पछताते रहे परन्तु  नर्मदा कभी पलटकर वापस नहीं आई.
पवित्र नदियों में सम्मिलित नर्मदा नदी को गंगा की तुलना में कहीं अधिक पवित्र माना जाता है. कहा जाता है कि गंगा भी खुद को पवित्र करने के लिए नर्मदा की शरण में आती हैं. मत्स्यपुराण के अनुसार  कनखल क्षेत्र में गंगा पवित्र है और कुरुक्षेत्र में सरस्वती. यमुना का जल एक सप्ताह में, सरस्वती का जल तीन दिन में, गंगा जल उसी दिन और नर्मदा का जल उसी क्षण पवित्र कर देता है.
वर्तमान काल में नर्मदा की भौगोलिक स्थिति भी आप देख सकते हैं. वह हमेशा उल्टी ही बहती मिलेगी, गंगा सहित अन्य नदियां जहां बंगाल सागर में गिरती है वहीं नर्मदा बंगाल की खाड़ी का रास्ता छोड़ कर विपरीत दिशा "अरब सागर" से जाकर विलीन होती हैं.

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