किस हद तक गिर जाए राजनीति कोई भरोसा नहीं....

जनपत की खबर , 457

लुधौरी खीरी। कभी साइकिल की सवारी तो कभी हाथी पर बैठना और जब काले कारनामे अधिक हो जाए तो मौजूदा सरकार के भजनों में लीन होकर बीजेपी के हो जाना यह सब लुधौरी प्रधान को अधिक भाता है। पांच साल मलाई खाने के बाद मतदाताओं को रिझाने के लिए लुधौरी प्रधान किस हद तक गुजर जाए यह पंचायत का नुमाइंदा सोंच भी नही सकता। अपने काले कारनामो को छिपाने के लिए भगवा चादर ओढ़कर जैसे तैसे कार्यकाल को गुजार दिया उंसके बाद अपनी बिरादरी और एससी मतदाताओं को रिझाने के लिए  फिर से पैतरा बदलकर हाथी पर सवार हो लिए इतने रंग तो गिरगिट भी नही बदलता । जब यह एक पार्टी के ना हो सके तो पंचायत की जनता के क्या होंगे...?

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