*लीलाओं के चित्रांकन से शुरू हुआ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2023*

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*गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन में जुटे 11 राज्यों के 26 चित्रकार*

*जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालु निहारेंगे चित्रांकन शिविर में बनाए हुए चित्र* 

वृंदावन। श्रीकृष्ण लीलाओं के राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर की शुरुआत के साथ ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव- 2023 प्रारंभ हो गया। चित्रांकन शिविर में देश के 11 राज्यों के चित्रकार वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी पहुंचे हैं। ये सभी भगवान की विभिन्न लीलाओं को अपनी तूलिका से कैनवास पर उतार रहे हैं। 03 सितंबर को भी लीलाओं के चित्र तैयार किए जाएंगे।
 उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा के तत्वावधान में प्रारंभ हुए इस शिविर का  शुभारंभ शनिवार को प्रदेश के गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न स्थानों से पधारे चित्रकारों के हाथों से बने भगवान की लीलाओं के चित्र हमारे लिए बड़ी उपलब्धि हैं। उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद के आमंत्रण पर ब्रज में पधारे आप सभी चित्रकारों का स्वागत है। प्रदेश के गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने सभी 26 महिला व पुरुष चित्रकारों को पटुका पहनाकर सम्मानित किया।
शुभारम्भ अवसर पर उ.प्र. ब्रज तीर्थ परिषद   के मुख्य कार्यपालक अधिकारी नगेन्द्र प्रताप जी एवं उप कार्यपालक अधिकारी जगदम्बिका प्रसाद पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के को-ऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने मंचस्थ गन्ना मंत्री श्री चौधरी का पटुका पहनाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर के उप निदेशक एवं राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर के समन्वयक डाॅ. यशवन्त सिंह राठौर ने शिविर के आयोजन के सम्बंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्ष से जन्माष्टमी पर  चित्रांकन शिविर स्थानीय व राज्य स्तर पर आयोजित किया जाता रहा है । इस चतुर्थ वर्ष में इस बार राष्ट्रीय स्तर का कला शिविर आयोजित किया गया है। कला शिविर में कृष्ण लीला के कथात्मक स्वरूपों को चित्रित किया जा रहा है। इसमें 11 राज्यों के चित्रकार प्रतिभाग कर रहे हैं। पूर्व में  कृष्ण  आधारित जो चित्र बने थे, वे उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद कार्यालय, रसखान समाधि और गीता शोध संस्थान कला वीथिका आदि में शोभायमान हैं। 
उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डाॅ. उमेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण के चित्रांकन की पुरातन परम्परा रही है। राधा की सखियों में से सखी चित्रलेखा जो चिकसौली की थी, स्वयं चित्रकार थीं। राधा व कृष्ण द्वारा एक दूसरे चित्र बनाए जाने का उल्लेख पुराणों में मिलता है। 
राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर में नवीन रमणीक लाल सोनी भुज गुजरात, संजीव शर्मा जयपुर, नवल किशोर गाजियाबाद, मनोज कुमार सकले मुंबई, विजय जाधव संगली महाराष्ट्र, डा प्रिंसराज मेरठ, विनोद कुमार कंबल नई दिल्ली, विनोद सिंह बाराबंकी, श्रीनिवास तेलंगाना, अहो विलंब प्रभाकर हैदराबाद, कुदाल्या हैरमठ पुणे, भारती परमार मथुरा, शाइमा मथुरा, प्रिया सिंह प्रयागराज, सोमा आनंद झा पटना बिहार, नेहा लखनऊ, मंजीत कौर चंडीगढ, कुसुम पांडेय हल्द्वानी उत्तराखंड, ऋचा सिंह कानपुर, डा कुमुद बाला कानपुर, शिवानी सोनी देवास मध्यप्रदेश, अजंली प्रभाकर भोपाल मध्यप्रदेश, रंजना शर्मा कोटा राजस्थान, डा वंदना जोशी राजसमंद राजस्थान, आशा वाराणसी व डाॅ. सुनीता वर्मा भिलाई छत्तीसगढ प्रतिभाग कर रही हैं। कला शिविर के समापन पर 04 सितंबर को अंतिम दिन लीलाओं के कैनवास पर अंकित चित्रों की प्रदर्शनी लगेगी जिसे आम दर्शक देख व सेल्फी ले सकेंगे।

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