*नेपाल के 100 रुपये की सीमा से सीमावर्ती व्यापार ठप, ₹62.50 से ऊपर सामान पर टैक्स से हजारों व्यापारी संकट में*

लखीमपुर खीरी , 3

*पलिया में व्यापारियों का जुलूस, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन: पीएम-सीएम से हस्तक्षेप की मांग*  

(विश्वकांत त्रिपाठी/केके शुक्ला)

*पलिया कलां, लखीमपुर खीरी।* नेपाल सरकार के नए कर नियम से भारत-नेपाल सीमा से सटे खीरी, बहराइच और उत्तराखंड के सीमावर्ती कस्बों की मंडियों में कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। नेपाल के नए फरमान के विरोध में गत दिवस 10 से अधिक मंडियों के करीब 3000 व्यापारियों ने विधायक रोमी साहनी के नेतृत्व में पलिया तहसील तक जुलूस निकाला और एसडीएम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम का ज्ञापन सौंपा।  

*क्या है नया नियम:* नेपाल सरकार ने हाल में लागू कानून में स्पष्ट किया है कि कोई भी नेपाली नागरिक 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य का भारतीय सामान बिना भंसार यानी टैक्स के नेपाल नहीं ले जा सकेगा। 100 नेपाली रुपये भारतीय मुद्रा में मात्र 62.50 रुपये होते हैं। इससे अधिक मूल्य के सामान पर नेपाल में प्रवेश के समय टैक्स चुकाना अनिवार्य होगा।  

*50 साल पुराना नियम बना मुसीबत:* व्यापारियों ने ज्ञापन में बताया कि करीब 50 साल पहले नेपाल सरकार ने नियम बनाया था कि नेपाली नागरिक 100 नेपाली रुपये तक का घरेलू उपयोगी सामान बिना टैक्स के ले जा सकते हैं। उस समय 100 रुपये की क्रय शक्ति आज के 10,000 रुपये से अधिक के बराबर थी। लेकिन नेपाल ने पुराने नियम को बिना संशोधन के सख्ती से लागू कर दिया है। आज की महंगाई में 62.50 रुपये में साबुन-तेल का एक पैकेट भी नहीं आता।  

*कितना असर:*  
- *प्रभावित क्षेत्र:* पलिया, सूंडा, चंदनचौकी, बनगवां, डिगनियां, गौरीफंटा, बसही, संपूर्णानगर, तिकुनिया मंडी, खीरी के अलावा उत्तराखंड के बनबसा, टनकपुर और बहराइच के रुपैडिहा की मंडियां।  
- *व्यापार का आधार:* इन सभी सीमावर्ती मंडियों का 80% से अधिक कारोबार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर है। रोजाना अनुमानित 5-7 करोड़ रुपये का खुदरा व्यापार नेपाल के ग्राहकों से होता था।  
- *वर्तमान हालात:* नियम लागू होने के बाद से इन मंडियों में सन्नाटा है। फुटकर दुकानदार से लेकर थोक व्यापारी तक भुखमरी की कगार पर हैं। किराना, कपड़ा, बर्तन, प्लास्टिक, कास्मेटिक और इलेक्ट्रॉनिक्स का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित।  

*व्यापारियों की मांग:* नगर व्यापार मंडल (कंछल गुट) अध्यक्ष गौरव गुप्ता और (श्याम बिहारी मिश्रा गुट) के अनूप मिश्रा ने कहा कि भारत सरकार नेपाल सरकार से उच्चस्तरीय वार्ता करे। 50 साल पुरानी 100 रुपये की सीमा को महंगाई के हिसाब से संशोधित कर कम से कम 10,000 नेपाली रुपये किया जाए, या पूर्व की तरह खुली छूट बहाल हो।  

*विधायक का आश्वासन:* विधायक रोमी साहनी ने कहा, "सीमावर्ती व्यापारियों की रोजी-रोटी का सवाल है। आवश्यकता पड़ी तो मैं स्वयं प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या रखूंगा। व्यापारियों को राहत दिलाना प्राथमिकता है।"  

इस दौरान तिकुनिया, संपूर्णानगर, बसही, चंदनचौकी, सूंडा सहित सभी मंडियों के व्यापार मंडल अध्यक्ष और हजारों व्यापारी मौजूद रहे। व्यापारियों ने "नेपाल का काला कानून वापस लो" के नारे भी लगाए।  

ज्ञात हो कि भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों का रोजाना आना-जाना होता है। नेपाल के पहाड़ी जिलों के लाखों लोगों के लिए भारतीय सीमावर्ती बाजार ही खरीदारी का मुख्य केंद्र हैं।

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